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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत उम्मीद के अनुसार नहीं हो रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान शर्तों को नहीं माने तो सैन्य विकल्प इस्तेमाल किया जा सकता है। ट्रंप ने पश्चिम एशिया में अमेरिका की बढ़ी हुई सैन्य तैनाती और क्यूबा पर भी अपनी टिप्पणियां कीं, जबकि बातचीत के तरीकों पर मैत्रीपूर्ण रुख बनाए रखने की बात कही।
ट्रंप ने ईरान को दि्या 15 दिन का अल्टीमेटम (Image Source: Internet)
New Delhi: ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ईरान अभी उन चीज़ों को देने को तैयार नहीं है जो अमेरिका चाहता है। इसके कारण कोई अंतर्निहित समझौता अभी तक नहीं हो सका है। उन्होंने कहा कि बातचीत जारी रहेगी, लेकिन लक्ष्य साफ है, ईरान को परमाणु हथियार नहीं मिलने चाहिए।
राष्ट्रपति ने पत्रकारों से कहा कि वे चाहते हैं कि बातचीत शांतिपूर्ण ढंग से हो, लेकिन ईरान के साथ समस्याएं बनी हुई हैं। अमेरिका का उद्देश्य क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना और परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना है।
ट्रंप ने चेतावनी दी कि अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है, लेकिन यदि ईरान बातचीत में सही तरीके से नहीं आएगा तो अमेरिका सैन्य विकल्प का उपयोग कर सकता है। उन्होंने कहा, "हम दुनिया की सबसे बड़ी सेना रखते हैं और जरूरत पड़ी तो इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।"
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हालांकि, ट्रंप ने यह भी जोड़ दिया कि उनकी प्राथमिकता शांति बनाए रखना है और वे चाहते हैं कि सैन्य कार्रवाई की आवश्यकता न पड़े। उन्होंने अमेरिका की नौसेना और एयर स्ट्राइक समूहों को मध्य पूर्व में तैनात करने का जिक्र किया, ताकि ईरान पर दबाव बनाया जा सके।
पत्रकारों ने ट्रंप से पूछा कि क्या ईरान पर हमला पूरे मध्य पूर्व युद्ध में बदल सकता है। राष्ट्रपति ने स्वीकार किया कि "जोखिम सदैव रहता है।" उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों पक्ष ईमानदारी से बातचीत करें।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका की रणनीति यह सुनिश्चित करना है कि ईरान परमाणु हथियार न बनाए। उन्होंने क्षेत्रीय सुरक्षा और अमेरिकी हितों की रक्षा को प्राथमिकता बताया। साथ ही उन्होंने यह संकेत दिया कि युद्ध का विकल्प अंतिम उपाय है, जिसे टालने की कोशिश की जा रही है।
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ट्रंप ने क्यूबा के आर्थिक संकट का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि क्यूबा के पास संसाधन कम हैं और स्थिति कठिन है, लेकिन वे अमेरिका के साथ बातचीत कर रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि क्यूबा के साथ बातचीत "दोस्ताना तरीके से नियंत्रण बदलने" वाली हो सकती है। उन्होंने इसे मैत्रीपूर्ण अधिग्रहण कहा और संकेत दिया कि बातचीत में शांति और सहयोग बनाए रखना अमेरिकी नीति का हिस्सा है।
ट्रंप की ये टिप्पणियां दर्शाती हैं कि अमेरिका क्षेत्रीय दबाव और कूटनीतिक प्रयासों के मिश्रण से ईरान और क्यूबा पर अपनी रणनीति लागू करने का प्रयास कर रहा है, जबकि युद्ध के जोखिम को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता।