हिमालय की गोद में कुदरत का तांडव: 30 मुल्कों की सांसे थमीं, जल-प्रलय के बीच सैकड़ों विदेशी नागरिक गुम

नेपाल-चीन सीमा पर ग्लेशियर फटने से आई फ्लैश फ्लड ने दुनिया को हिला दिया है। 390 से अधिक मौतों के बीच भारत, अमेरिका और ब्रिटेन समेत 30 से ज्यादा देशों के 500 विदेशी नागरिक लापता हैं। राहत दल युद्धस्तर पर खोज अभियान में जुटे हैं।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 28 August 2026, 9:04 AM IST
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Kathmandu: नेपाल और चीन (तिब्बत) के सीमावर्ती इलाकों में प्रकृति का ऐसा भयानक रूप देखने को मिला है, जिसने पूरे विश्व की चिंता बढ़ा दी है। रासुवागढ़ी के पास तिब्बत में एक विशाल ग्लेशियर अचानक ढह गया, जिससे भोटेकोशी और त्रिशूली नदियां उफान पर आ गईं।

इस अचानक आई बाढ़ (फ्लैश फ्लड) ने देखते ही देखते पूरे इलाके को मलबे और पानी के सैलाब में तब्दील कर दिया। इस आपदा में अब तक 390 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि 1,400 से अधिक लोग गायब हैं।

वैश्विक संकट: भारत समेत 30 से अधिक देशों के सैलानी फंसे

यह केवल एक स्थानीय प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय संकट बन चुका है। आपदा के वक्त हिमालयी इलाकों में दुनिया भर के पर्यटक और श्रद्धालु मौजूद थे।

आंकड़ों के मुताबिक, 30 से ज्यादा देशों के करीब 500 विदेशी लापता हैं। इनमें सबसे बड़ी संख्या भारतीयों की है, जिनके 288 नागरिक संपर्क से बाहर हैं। इसके अलावा अमेरिका के करीब 90, मलेशिया के 51, यूक्रेन के 55 और ब्रिटेन-ऑस्ट्रेलिया के दर्जनों नागरिक बाढ़ की चपेट में आ गए हैं।

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हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट तबाह, कस्बे बने मलबे का ढेर

बाढ़ का बहाव इतना तेज था कि रास्तों, सड़कों और पक्के पुलों का नामोनिशान मिट गया। दक्षिण कोरिया के 9 नागरिक एक जलविद्युत परियोजना पर काम कर रहे थे, जो प्लांट समेत लापता बताए जा रहे हैं। तिब्बत के ग्यिरोंग इलाके में भी सैकड़ों लोग फंसे हैं। ड्रोन तस्वीरों में दिख रहा है कि पहाड़ से आए कीचड़ और मलबे ने पूरे-पूरे कस्बों को निगल लिया है।

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दुर्गम पहाड़ियों पर जिंदगी की जंग, युद्धस्तर पर रेस्क्यू

नेपाली सेना, पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल (APF) के जवान अपनी जान जोखिम में डालकर रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे हैं। हालांकि, लगातार बिगड़ते मौसम और कटे हुए रास्तों के कारण हेलीकॉप्टरों को लैंड कराने में भारी दिक्कतें आ रही हैं। भारतीय दूतावास सहित कई देशों के उच्चायोग नेपाल सरकार के लगातार संपर्क में हैं, ताकि अपने नागरिकों तक जल्द से जल्द राहत पहुंचाई जा सके।

Location :  Kathmandu

Published :  28 August 2026, 9:04 AM IST

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