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जनगणना में जवाब न देने पर भी दर्ज होगी जानकारी? (Img : Pinterest)
New Delhi: देश में होने वाली आगामी जनगणना को लेकर कई अहम सवाल सामने आ रहे हैं। इस बार जनगणना में पहले के मुकाबले अधिक जानकारियां जुटाई जानी हैं। आधार नंबर, बैंक खाते, माता-पिता का धर्म और जन्म स्थान जैसी जानकारियां भी पूछे जाने की बात सामने आई है। ऐसे में सवाल है कि अगर कोई व्यक्ति किसी सवाल का जवाब देने से इनकार करता है तो क्या उसकी जानकारी फिर भी दर्ज होगी? साथ ही क्या जनगणना के आंकड़ों से धर्म परिवर्तन और अंतरजातीय विवाह की स्थिति का भी पता चल सकेगा?
महारजिस्ट्रार जनगणना कार्यालय की ओर से जनगणनाकर्मियों को दी गई ट्रेनिंग के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति किसी सवाल का जवाब नहीं देता है तो संबंधित कॉलम को खाली छोड़ना होगा। जनगणनाकर्मी जवाब देने के लिए व्यक्ति पर दबाव नहीं बना सकते। ऐसे में कितने लोगों ने किन सवालों का जवाब नहीं दिया, इससे संबंधित जानकारी सामने आ सकती है।
खास तौर पर आधार नंबर और बैंक खातों से जुड़े सवालों को लेकर लोगों की निजता और सुरक्षा संबंधी चिंताएं हो सकती हैं। हालांकि, इन सवालों के जवाब नहीं देने वाले लोगों की संख्या से यह समझने में मदद मिल सकती है कि लोग किन जानकारियों को साझा करने में ज्यादा संवेदनशीलता बरत रहे हैं।
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इस बार जनगणना में करीब 40 सवाल पूछे जाने की बात सामने आई है। इसके मुकाबले 2011 की जनगणना में 29 सवाल पूछे गए थे। ऐसे में परिवारों को सभी जानकारियां उपलब्ध कराने में पहले की तुलना में अधिक समय लग सकता है।
अधिकारियों के अनुसार, जनगणना से जुड़ी व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाएगी। साथ ही ऐसी जानकारी को अदालत में साक्ष्य के तौर पर पेश नहीं किया जा सकता।
जनगणना में मां और पिता के धर्म तथा उनके जन्म स्थान से जुड़ी जानकारी भी मांगे जाने की बात सामने आई है। यदि माता-पिता जीवित नहीं हैं या परिवार में मौजूद नहीं हैं, तब भी उपलब्ध जानकारी के आधार पर सवालों के जवाब दर्ज किए जा सकते हैं।
यदि किसी परिवार में माता-पिता और बच्चों के धर्म अलग-अलग पाए जाते हैं, तो इससे अंतरधार्मिक विवाह या धर्म परिवर्तन से जुड़ी स्थितियों का सांख्यिकीय आकलन संभव हो सकता है। इससे यह भी समझने में मदद मिल सकती है कि अलग-अलग क्षेत्रों और सामाजिक-आर्थिक समूहों में धर्म परिवर्तन की स्थिति क्या है।
जाति से जुड़ी जानकारी के आधार पर भी अंतरजातीय विवाह की स्थिति का आकलन संभव हो सकता है। उदाहरण के लिए, यदि एक ही परिवार में एक सदस्य अनुसूचित जाति से है और दूसरा गैर-अनुसूचित जाति या गैर-अनुसूचित जनजाति वर्ग से है, तो इससे अंतरजातीय विवाह से संबंधित आंकड़े तैयार किए जा सकते हैं।
हालांकि, किसी व्यक्ति द्वारा सवाल का जवाब नहीं देने की स्थिति में जनगणनाकर्मी उसे जवाब देने के लिए बाध्य नहीं कर सकते। ऐसे में संबंधित कॉलम खाली छोड़ा जाएगा।
सरकार की ओर से राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर यानी NPR को लेकर कोई नया औपचारिक ऐलान नहीं किया गया है। हालांकि, जनगणना में जन्म स्थान, प्रवास, धर्म, जन्मतिथि, आधार और मतदाता पहचान पत्र जैसी जानकारियां जुटाने के प्रस्ताव के चलते इस तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं कि इन्हीं आंकड़ों का इस्तेमाल भविष्य में NPR के लिए किया जा सकता है।
NPR में किसी क्षेत्र में सामान्य रूप से रहने वाले लोगों का विवरण दर्ज किया जाता है। इसे पहली बार वर्ष 2010 में तैयार किया गया था।
आगामी जनगणना में सवालों की संख्या और मांगी जाने वाली व्यक्तिगत जानकारी बढ़ने के साथ निजता का मुद्दा भी महत्वपूर्ण हो गया है। हालांकि, जनगणना नियमों के तहत किसी व्यक्ति को किसी सवाल का जवाब देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि लोग संवेदनशील जानकारियां साझा करने को लेकर कितना भरोसा दिखाते हैं और कितने सवालों के जवाब खाली रह जाते हैं।
Location : New Delhi
Published : 28 August 2026, 8:24 AM IST
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