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सुल्तानपुर में पुलिस मुठभेड़ में मारा गया सामूहिक दुष्कर्म का आरोपी तालिब उर्फ आजम खां, जो कई अपराधों में शामिल था, का अपराधी जीवन अंतत: खत्म हो गया। उसकी गिरफ्तारी के बाद, पुलिस ने उसकी घटनाओं का खुलासा किया और उसे न्याय के दायरे में लाया।
पढ़ें मुठभेड़ में मारे गए आजम की कहानी
Sultanpur: जिले में पुलिस मुठभेड़ के दौरान मारा गया सामूहिक दुष्कर्म का आरोपी तालिब उर्फ आजम खां एक ऐसे अपराधी थे, जिन्होंने युवावस्था में ही अपराध की दुनिया से नाता जोड़ लिया था। उनका अपराधी जीवन कई सालों तक चला और वो कई गंभीर अपराधों में शामिल रहे, जिनमें हत्या, लूट और सामूहिक दुष्कर्म जैसी घटनाएं शामिल हैं।
साल 2018 में तालिब उर्फ आजम खां का नाम पुलिस के रिकॉर्ड में पहली बार आया, जब लखीमपुर खीरी के फरधान थाने में उसकी गिरफ्तारी के बाद चोरी का मामला दर्ज किया गया था। उस समय उसकी उम्र 18 साल थी और वह अपने जीवन के शुरुआती दिनों से ही अपराध की दुनिया में सक्रिय हो गया था। इसके बाद तालिब ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और विभिन्न गंभीर अपराधों में शामिल रहा। पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए कई बार दबिश दी, लेकिन वह हर बार बचता गया।
तालिब की अपराधी दुनिया की गतिविधियाँ बढ़ती जा रही थीं। उसके खिलाफ पुलिस ने कई बार शिकंजा कसा, लेकिन उसकी चालाकी और शातिर दिमाग के सामने पुलिस बेबस हो गई। उसका नाम फरधान थाने में छह, खीरी थाने में चार, नीमगांव-सदर कोतवाली में एक और गोला कोतवाली में चार बार दर्ज हुआ। इसके अलावा मितौली थाने में भी एक मुकदमा दर्ज था। पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए तालिब अक्सर घर और अनजान जगहों पर रहकर अगली योजना बनाता था।
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तालिब का सबसे बड़ा अपराध उस समय सामने आया, जब उसने एक छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म किया। इस घटना के बाद वह कुछ दिन तक लापता हो गया, लेकिन बाद में फिर से घर लौट आया। तालिब ने अपनी दुष्कर्म की घटनाओं के बाद भी पुलिस से बचने के लिए की-पैड मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया, ताकि पुलिस उसका ट्रेस ना कर सके। हालांकि, एक स्मार्टफोन के जरिए पुलिस ने उसका ट्रैक किया और उसे मुठभेड़ में मार गिराया।
तालिब का गाँव गौरिया में इतना खौफ था कि उसके मरने के बाद भी कोई भी उसके बारे में बात करने को तैयार नहीं था। उसकी गतिविधियों से प्रभावित गाँववाले कभी भी उसके खिलाफ आवाज उठाने का साहस नहीं जुटा पाए थे। तालिब की दबंगई और खौफ के कारण गांव के लोग चुपचाप रहते थे और कभी भी पुलिस को तालिब की सही लोकेशन नहीं बताई थी।
कुल मिलाकर, तालिब का अपराधी जीवन उसकी मौत के साथ समाप्त हुआ। सोमवार रात को उसके शव को पोस्टमॉर्टम के बाद गांव लाया गया। हालांकि, मृतक के घर में कुछ ही परिजन मौजूद थे, जबकि गाँव के अधिकांश लोग तालिब की कार्यशैली से नाराज थे। मंगलवार को सुबह तालिब के शव को पुलिस की मौजूदगी में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। सीओ रमेश कुमार तिवाही ने बताया कि गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़ी निगरानी रखी गई थी।
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अपराधी तालिब को अंततः पुलिस ने एक मुठभेड़ के दौरान मार गिराया। पुलिस का कहना है कि तालिब एक शातिर अपराधी था, जो कई गंभीर अपराधों में संलिप्त था। उसकी गिरफ्तारी के बाद पुलिस को उसकी कई वारदातों के बारे में जानकारी मिली और अंत में उसे सजा मिल गई। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया था, लेकिन जब उसे पकड़ने के लिए दबिश दी गई, तो वह हर बार पुलिस से बच जाता था।
तालिब के मारे जाने के बाद गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की। स्थानीय प्रशासन ने उसके अंतिम संस्कार के दौरान पुलिस सुरक्षा तैनात की और शव को सुबह 10 से 11 बजे के बीच सुपुर्द-ए-खाक किया। गांव में शांति बनाए रखने के लिए सीओ रमेश कुमार तिवाही ने गश्त बढ़ा दी और किसी भी तरह की अफवाहों को फैलने से रोका।