करहल एक्सप्रेसवे हादसे के बाद अस्पताल पर गंभीर आरोप, “पैसे नहीं तो मरीज ले जाओ”

करहल एक्सप्रेसवे हादसे के बाद घायलों और उनके परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित परिवारों का कहना है कि इलाज के दौरान उनसे पैसे मांगे जा रहे हैं और अस्पताल स्टाफ का रवैया संवेदनहीन है। हादसे में घायल कई लोग अब भी गंभीर हालत में भर्ती हैं, जबकि एक 7 साल की बच्ची ICU में जिंदगी और मौत से जूझ रही है।

Updated : 21 May 2026, 4:57 PM IST
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Saifai: आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर करहल के पास हुए भीषण सड़क हादसे के बाद अब घायलों और उनके परिवारों का दर्द सामने आने लगा है। नेपाल से दिल्ली जा रही रोडवेज बस की ट्रक से टक्कर ने कई परिवारों की जिंदगी बदल दी। हादसे में एक यात्री की मौत हो गई, जबकि दो दर्जन से ज्यादा लोग घायल हुए। घायलों को इलाज के लिए सैफई भेजा गया, लेकिन अब अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लग रहे हैं।

घायल परिवारों का कहना है कि हादसे के बाद जिस सहारे और संवेदनशीलता की उम्मीद थी, वहां उन्हें परेशानी, अनदेखी और पैसों की मांग का सामना करना पड़ रहा है। “डाइनामाइट न्यूज़” की ग्राउंड रिपोर्ट में कई परिवारों ने अपना दर्द बयान किया और सरकार से मदद की गुहार लगाई।

“30-40 हजार नहीं हैं तो मरीज को ले जाओ”

हादसे में घायल हुई 50 वर्षीय भानमती की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। उनका पैर बुरी तरह टूट गया है। वहीं उनके साथ सफर कर रहे 23 वर्षीय नाती नितीश के सिर में गंभीर चोट आई है। दोनों नेपाल से दिल्ली होते हुए हिमाचल जाने के लिए निकले थे, लेकिन सफर एक दर्दनाक हादसे में बदल गया।

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भानमती की बेटी ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि डॉक्टरों और कर्मचारियों का रवैया बेहद असंवेदनशील है। परिवार का आरोप है कि अस्पताल कर्मियों ने साफ शब्दों में कहा कि अगर पैर के ऑपरेशन के लिए 30 से 40 हजार रुपये नहीं हैं तो मरीज को यहां से ले जाओ।

पति-पत्नी दोनों अस्पताल में भर्ती

हादसे में गोरखपुर निवासी 48 वर्षीय आशा देवी और उनके पति रामदुलारे भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। आशा देवी के सिर और हाथ में चोटें आई हैं, जबकि उनके पति का पैर टूट गया है और दूसरे पैर में भी गंभीर चोट बताई जा रही है। परिवार के लोग अस्पताल के बाहर घंटों बैठे नजर आए। उनका कहना है कि वे लगातार बेहतर इलाज की मांग कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। परिजनों का आरोप है कि मरीजों की हालत गंभीर होने के बावजूद इलाज की प्रक्रिया धीमी है और अस्पताल स्टाफ का व्यवहार भी ठीक नहीं है।

ICU में मौत से लड़ रही 7 साल की बच्ची

इस हादसे की सबसे दर्दनाक तस्वीर 35 वर्षीय नीलावती और उनकी सात साल की बेटी की है। हादसे में नीलावती की रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट आई है, जबकि उनकी मासूम बेटी ICU में भर्ती है और कोमा में बताई जा रही है। बिस्तर पर दर्द से कराहती नीलावती अपनी बच्ची को लेकर लगातार रो रही थीं। उन्होंने भावुक होकर सरकार से अपील की कि उनकी बेटी को बचा लिया जाए। उनका कहना है कि बच्ची को बेहतर इलाज की जरूरत है और उसे किसी बड़े अस्पताल में रेफर किया जाना चाहिए।

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“यहां कोई सुनने वाला नहीं”

घायलों और उनके परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन हादसे के पीड़ितों के प्रति संवेदनशीलता नहीं दिखा रहा। कई लोगों ने कहा कि मरीजों को समय पर देखभाल नहीं मिल रही और अस्पताल स्टाफ का रवैया बेहद रूखा है। कुछ परिवारों ने मांग की कि उन्हें उनके गृह जनपद गोरखपुर के आसपास किसी अस्पताल में शिफ्ट किया जाए ताकि परिवार के लोग आसानी से देखभाल कर सकें। वहीं कुछ लोगों ने दिल्ली रेफर करने की मांग उठाई ताकि गंभीर मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सके।

Location :  Saifai

Published :  21 May 2026, 4:19 PM IST

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