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थानेदार की आत्महत्या में खुला हनीट्रैप का राज (IMG: Gemini)
Basti: बस्ती में वाल्टरगंज के तत्कालीन थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह की आत्महत्या के मामले ने अब सनसनीखेज मोड़ ले लिया है। पुलिस ने जांच के बाद दावा किया है कि थानेदार को हनीट्रैप में फंसाकर ब्लैकमेल किया जा रहा था। पुलिस के मुताबिक, एक महिला ने सूर्य प्रकाश सिंह के साथ निजी संबंध बनाए और उनके निजी पलों का वीडियो बना लिया। इसके बाद वीडियो वायरल करने और आत्महत्या करने की धमकी देकर उनसे कथित तौर पर एक करोड़ रुपये की मांग की जा रही थी। लगातार मानसिक दबाव के बीच थानेदार ने आत्महत्या कर ली। मामले में पुलिस ने एक महिला, उसके पिता और एक अधिवक्ता को गिरफ्तार किया है।
29 अगस्त को सूर्य प्रकाश सिंह का शव बस्ती कलेक्ट्रेट परिसर स्थित उनके सरकारी आवास में फंदे से लटका मिला था। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था। सूर्य प्रकाश सिंह मूलरूप से आजमगढ़ के अतरौलिया थाना क्षेत्र के भीलमपुर छपरा के रहने वाले थे। शुरुआत में पुलिस ने मामले की जांच आत्महत्या के एंगल से शुरू की। थानेदार के मोबाइल फोन की जांच के दौरान पुलिस को कुछ ऐसे सुराग मिले, जिनके आधार पर तीन लोगों को चिह्नित किया गया।
शनिवार देर रात सूर्य प्रकाश सिंह के बेटे संदीप सिंह की तहरीर पर तीनों आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। इसके बाद रविवार सुबह करीब 7:55 बजे कोतवाली पुलिस और सर्विलांस टीम ने तीनों को सदर अस्पताल के पास से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक बोलेरो और तीन मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं। अब इन मोबाइल फोन की जांच के जरिए पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने किन-किन लोगों से संपर्क किया था।
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घटना का खुलासा करते हुए डीआईजी संजीव त्यागी ने बताया कि मुख्य आरोपी प्रियंका चौधरी की उम्र करीब 32 साल है। पुलिस के मुताबिक, उसका पति से करीब 10 साल पहले अलगाव हो चुका है। वह मुंबई में रहकर ब्यूटी पार्लर और स्पा सेंटरों में काम करती थी। पुलिस का दावा है कि प्रियंका पैसे वाले लोगों को अपने कथित मोहजाल में फंसाती थी। इसके बाद उनके निजी पलों के वीडियो और ऑडियो तैयार किए जाते थे। फिर व्हाट्सऐप, वीडियो कॉल और चैटिंग के जरिए उन्हें ब्लैकमेल कर रकम की मांग की जाती थी।
पुलिस के अनुसार, ब्लैकमेलिंग के दौरान आरोपियों की ओर से पीड़ितों पर भावनात्मक दबाव भी बनाया जाता था। पुलिस का दावा है कि प्रियंका वीडियो कॉल पर अपने हाथ की नस काटने और खून निकलने का दृश्य दिखाकर सामने वाले व्यक्ति को डराती थी। इसके बाद मोटी रकम की मांग की जाती थी। पुलिस के मुताबिक, इस पूरी कथित वसूली में महिला का पिता रामनयन चौधरी और अधिवक्ता विजय प्रकाश यादव भी सहयोग करते थे।
पुलिस की जांच में हनीट्रैप नेटवर्क के कथित तौर पर कई शिकार सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार, प्रियंका और उसका पिता रामनयन वाल्टरगंज निवासी डॉ. उमेश के मकान में किराये पर रहते थे। पुलिस का दावा है कि दोनों ने मिलकर डॉ. उमेश को भी कथित तौर पर हनीट्रैप में फंसाया और उनसे चार लाख रुपये ऐंठ लिए। इसके अलावा पुलिस के मुताबिक, उनके चालक अहमद रजा से पांच लाख रुपये और मध्य प्रदेश निवासी आर्यन दीक्षित उर्फ जितेंद्र दीक्षित से 15 लाख रुपये भी कथित तौर पर ब्लैकमेलिंग के जरिए लिए गए।
पुलिस के अनुसार, इसी कथित नेटवर्क के तहत प्रियंका ने सूर्य प्रकाश सिंह को भी अपने जाल में फंसाया था। पुलिस का दावा है कि महिला ने थानेदार के साथ संबंध बनाए और उनके निजी पलों का वीडियो तैयार किया। इसके बाद वीडियो को वायरल करने और खुद आत्महत्या करने की धमकी देकर सूर्य प्रकाश सिंह पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था। पुलिस के मुताबिक, उनसे एक करोड़ रुपये की मांग की जा रही थी।
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पुलिस के मुताबिक, सूर्य प्रकाश सिंह की आत्महत्या वाले दिन दोपहर 1:41 बजे अधिवक्ता विजय प्रकाश ने उन्हें आखिरी कॉल की थी। पुलिस का दावा है कि आरोपियों ने रकम को लेकर बातचीत और समझौते के लिए सूर्य प्रकाश सिंह को बुलाया था। उन्हें कथित तौर पर यह भी कहा गया था कि अगर पैसे नहीं दिए गए तो महिला आत्महत्या कर लेगी। पुलिस के अनुसार, एक करोड़ रुपये की मांग और लगातार बनाए जा रहे मानसिक दबाव के बीच सूर्य प्रकाश सिंह बेहद परेशान थे।
पुलिस ने आरोपियों की संपत्ति और आर्थिक गतिविधियों की जांच भी शुरू कर दी है। डीआईजी संजीव त्यागी के मुताबिक, करीब दो वर्ष पहले प्रियंका ने एक बोलेरो खरीदी थी। पुलिस का दावा है कि यह वाहन कथित तौर पर हनीट्रैप के जरिए वसूली गई रकम से खरीदा गया था। रविवार को गिरफ्तारी के दौरान यही बोलेरो पुलिस ने बरामद कर ली। इसके साथ तीन मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं। अब पुलिस मोबाइल फोन, कॉल डिटेल, चैट और पैसों के लेनदेन की जांच के जरिए कथित नेटवर्क की पूरी कड़ी जोड़ने में जुटी है।
डीआईजी संजीव त्यागी के मुताबिक, जांच में इस बात की जानकारी मिली है कि इस कथित हनीट्रैप नेटवर्क में दर्जनों अन्य लोग भी फंसे हो सकते हैं। पुलिस अब उन लोगों की पहचान करने और पूरे नेटवर्क के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश कर रही है। इसके साथ ही पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि ब्लैकमेलिंग के जरिए कितनी रकम वसूली गई और इस रकम से कितनी संपत्ति बनाई गई।
पुलिस के मुताबिक, हनीट्रैप के जरिए कथित तौर पर अर्जित की गई संपत्तियों की जांच की जा रही है। डीआईजी ने कहा है कि यदि जांच में संपत्तियां अवैध रूप से अर्जित पाई जाती हैं तो उन्हें जब्त कराने की कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में पुलिस की जांच अब सिर्फ सूर्य प्रकाश सिंह की आत्महत्या तक सीमित नहीं रह गई है। जांच का दायरा कथित हनीट्रैप नेटवर्क, दूसरे पीड़ितों, आर्थिक लेनदेन, डिजिटल सबूत और आरोपियों की संपत्तियों तक पहुंच गया है।
Location : Basti
Published : 7 September 2026, 4:31 PM IST