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मेरठ के कपसाड़ कांड में आरोपी पारस सोम ने कोर्ट में खुद को निर्दोष बताया। आरोपी ने दावा किया कि रूबी अपनी मर्जी से उसके साथ गई थी और हत्या नहीं की गई। गांव अब भी पुलिस छावनी बना है और मामले पर सियासत गरमाई हुई है।
कोर्ट में आरोपी पारस सोम का दावा
Meerut: मेरठ के चर्चित कपसाड़ अपहरण और हत्या कांड में उस वक्त नया मोड़ आ गया, जब आरोपी पारस सोम को पुलिस ने पूछताछ के बाद कोर्ट में पेश किया। अदालत में पेशी के दौरान आरोपी ने जज के सामने खुद को निर्दोष बताते हुए बड़ा दावा किया। सूत्रों के मुताबिक, पारस सोम ने कहा कि उसने न तो किसी महिला की हत्या की है और न ही लड़की का अपहरण किया। आरोपी का कहना था कि युवती रूबी अपनी मर्जी से उसके साथ गई थी और उसे झूठे केस में फंसाया जा रहा है।
हालांकि आरोपी के इन दावों के बावजूद कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पारस सोम को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। पेशी के दौरान कोर्ट परिसर में भारी पुलिस बल तैनात रहा। किसी भी तरह की अव्यवस्था या तनाव की स्थिति से निपटने के लिए पुलिस पूरी तरह सतर्क दिखाई दी। कोर्ट परिसर के बाहर भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
कपसाड़ गांव में हालात अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हो सके हैं। गांव में गुस्सा, तनाव और इंतजार तीनों एक साथ दिखाई दे रहे हैं। मृतका सुनीता का परिवार इंसाफ की मांग कर रहा है और आरोपी के बयान से परिवार का गुस्सा और बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि सब कुछ खुलेआम हुआ और अब आरोपी बयान बदलकर खुद को बचाने की कोशिश कर रहा है।
कपसाड़ कांड: पारस सोम को 14 दिन की न्यायिक हिरासत, रूबी की कोर्ट में पेशी
कपसाड़ गांव बीते कई दिनों से पुलिस छावनी में तब्दील है। गांव के चारों ओर बैरीकेडिंग है और हर एंट्री पॉइंट पर पुलिसकर्मी तैनात हैं। गांव के अंदर किसी भी बाहरी व्यक्ति को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है। हालात ऐसे हैं कि विधायक से लेकर सांसद तक को गांव में जाने से रोक दिया गया है।
पारस सोम की कोर्ट में पेशी के दौरान जहां अंदर कानूनी प्रक्रिया चल रही थी, वहीं बाहर सियासी सरगर्मी तेज रही। कपसाड़ कांड शुरू होने के बाद से ही यह मामला राजनीति का केंद्र बन गया है। विपक्ष लगातार सरकार पर कानून व्यवस्था को लेकर सवाल उठा रहा है, जबकि प्रशासन हालात काबू में रखने की कोशिश में जुटा है।
कपसाड़ गांव के बाहर शनिवार और रविवार को पुलिस और विपक्षी नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। सपा सांसद रामजी लाल सुमन और विधायक अतुल प्रधान को काशी टोल प्लाजा पर पुलिस ने रोक दिया। इसके बाद दोनों नेताओं ने वहीं सड़क पर धरना दे दिया। धरने के दौरान पुलिस और नेताओं के बीच बहस हुई, जो आगे चलकर धक्का-मुक्की तक पहुंच गई। हालांकि पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए किसी भी नेता को गांव के भीतर जाने की अनुमति नहीं दी।
कपसाड़ गांव के सभी रास्ते सील कर दिए गए हैं। गांव का हर कट, हर मोड़ पुलिस की चेकिंग के दायरे में है। आने-जाने वाले हर व्यक्ति से पूछताछ की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचने के लिए यह कदम उठाया गया है।
कोर्ट में आरोपी द्वारा दिया गया बयान पुलिस और जांच एजेंसियों के लिए नई चुनौती बन गया है। पुलिस अब रूबी के बयान, मेडिकल रिपोर्ट, कॉल डिटेल्स और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम को जोड़ने में जुटी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों और सबूतों की गहनता से जांच की जाएगी।
पूरा मामला बृहस्पतिवार सुबह का है। कपसाड़ गांव निवासी सुनीता अपनी बेटी रूबी के साथ खेत की ओर जा रही थीं। इसी दौरान गांव का ही पारस सोम अपने साथियों के साथ कार से वहां पहुंचा और रूबी को जबरन ले जाने की कोशिश की। सुनीता ने इसका विरोध किया तो उन पर फरसे से हमला किया गया, जिससे उनकी मौके पर ही गंभीर चोटें आईं और बाद में अस्पताल में उनकी मौत हो गई। इसके बाद आरोपी रूबी को कार में डालकर फरार हो गए।