प्रतिभा की घिनौनी प्रतिभा: नवजात बच्चों की खरीद-फरोख्त का खेला गंदा खेल, 8 लाख से शुरू होती थी मासूम जिंदगी की कीमत…

दिल्ली पुलिस ने नवजात बच्चों की खरीद-फरोख्त करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। गिरोह गरीब परिवारों से बच्चों को खरीदकर बेऔलाद दंपतियों को लाखों रुपये में बेचता था। अस्पताल की आड़ में फर्जी दस्तावेज भी तैयार किए जाते थे।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 19 June 2026, 10:14 AM IST
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New Delhi: दिल्ली में नवजात बच्चों की तस्करी का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने इंसानियत को झकझोर दिया है। पुलिस ने एक ऐसे अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो बच्चों की चाह रखने वाले दंपतियों और गरीब परिवारों की मजबूरी का फायदा उठाकर नवजात बच्चों का सौदा कर रहा था। जांच में सामने आया है कि गिरोह छोटे बच्चों को गरीब परिवारों से महज 10 से 15 हजार रुपये में खरीदता था और फिर उन्हीं बच्चों को बेऔलाद दंपतियों को 8 से 10 लाख रुपये तक में बेच दिया जाता था।

अस्पताल की आड़ में चलता था पूरा खेल

पुलिस जांच में सामने आया कि इस गिरोह की मुख्य भूमिका निभाने वाली प्रतिभा नाम की महिला नवजात बच्चों के खरीदारों की तलाश करती थी। उसके दिल्ली-एनसीआर के कई आईवीएफ सेंटर और अस्पतालों से संपर्क थे। वह ऐसे दंपतियों की तलाश करती थी, जिनके यहां बच्चे नहीं हो पा रहे थे। इसके अलावा ऐसे परिवारों को भी निशाना बनाया जाता था, जिनके यहां बेटियां ही थीं और वह बेटा चाहते थे।

गुजरात और राजस्थान से लाए जाते थे बच्चे

पुलिस के अनुसार गिरोह में शामिल ज्योति, शालू, ललित और विपिन की जिम्मेदारी गुजरात और राजस्थान से बच्चों को दिल्ली लाने की थी। बच्चे को लाने के बाद उसे बेगमपुर, रोहिणी स्थित हीरा मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल में रखा जाता था। इसके बाद खरीदार दंपती को अस्पताल बुलाया जाता और बच्चे के जन्म से जुड़े फर्जी दस्तावेज तैयार कर उसे सौंप दिया जाता था। शुरुआती पूछताछ में आरोपियों ने करीब 30 बच्चों की बिक्री की बात कबूल की है। हालांकि पुलिस को शक है कि यह आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा हो सकता है।

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लड़कों की सबसे ज्यादा मांग

पूछताछ में सामने आया कि ज्यादातर खरीदारों की मांग लड़के की होती थी। गिरोह से जुड़े आरोपी साएबा भाई घमर ने पुलिस को बताया कि अधिकतर सौदे लड़कों के ही होते थे। उसके अनुसार करीब 99 फीसदी मामलों में लड़कों की मांग की जाती थी। इसी वजह से राजस्थान और गुजरात के परिवारों से खासतौर पर लड़कों की तलाश की जाती थी।

ऑन डिमांड होता था बच्चों का इंतजाम

आरोपियों ने पुलिस को बताया कि बच्चों की सप्लाई मांग के हिसाब से की जाती थी। दिल्ली से जब किसी बच्चे की मांग आती थी तो साएबा भाई बच्चे की व्यवस्था करता था। इसके बाद ज्योति, शालू, ललित और कार चालक विपिन को इसकी जानकारी दी जाती थी। ये लोग कार से गुजरात या राजस्थान जाते थे और बच्चे को लेकर दिल्ली आते थे। कई बार बच्चे को सीधे अस्पताल पहुंचाया जाता था और कई बार पहले पहाड़गंज लाया जाता था।

पुलिस ने नकली ग्राहक बनाकर पकड़ा

मामले का खुलासा तब हुआ जब पुलिस को पहाड़गंज इलाके से सूचना मिली कि एक महिला अलग-अलग बच्चों के साथ घूम रही है। पुलिस ने एक टीम को नकली ग्राहक बनाकर भेजा। सौदा तय होने के बाद आरोपियों को 20 हजार रुपये की टोकन रकम दी गई। 5 जून को जैसे ही आरोपी नवजात बच्चा सौंपने पहुंचे, पुलिस ने ज्योति उर्फ कमलेश को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद उसकी साथी शालू और ललित को भी पकड़ लिया गया। पूछताछ में गिरोह के तार हीरा मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल से जुड़े मिले, जिसके बाद पुलिस ने अस्पताल की संचालिका डॉ. विवेकी को भी गिरफ्तार कर लिया।

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अस्पताल संचालिका पर भी कार्रवाई

पुलिस के मुताबिक डॉ. विवेकी डॉक्टर नहीं होने के बावजूद अस्पताल चला रही थी। आरोप है कि अस्पताल में ही बच्चों के फर्जी जन्म प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज तैयार किए जाते थे। पुलिस अब मेडिकल काउंसिल को पत्र लिखकर अस्पताल के लाइसेंस की जांच कराने की तैयारी कर रही है।

कई राज्यों में फैला था नेटवर्क

इस गिरोह के तार दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात तक जुड़े हुए मिले हैं। पुलिस ने ग्वालियर से मुकेश और रीमा पाल को गिरफ्तार किया, जिन्होंने एक बच्चे के लिए 9 लाख रुपये दिए थे। वहीं पानीपत से सन्नी अरोड़ा, रितु अरोड़ा और सारिका को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अब राजस्थान और मध्य प्रदेश में छापेमारी कर रही है।

बरामद बच्चों को असली माता-पिता से मिलाने की तैयारी

पुलिस के कब्जे से मिले पांच नवजातों की उम्र करीब 27 दिन से चार महीने के बीच बताई जा रही है। इनमें चार बच्चे आदिवासी परिवारों से जुड़े होने की संभावना है, जबकि एक बच्चा दिल्ली का बताया जा रहा है। पुलिस अब बच्चों के असली माता-पिता की पहचान करने में जुटी है। पहचान पूरी होने के बाद बच्चों को उनके जैविक माता-पिता को सौंपा जाएगा। इस पूरे मामले में पुलिस ने आरोपियों के पास से करीब 2.92 लाख रुपये नकद भी बरामद किए हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि यह रकम एक और बच्चे की खरीद के लिए इस्तेमाल होने वाली थी। फिलहाल पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस काले कारोबार में कितने और परिवारों को निशाना बनाया गया।

Location :  New Delhi

Published :  19 June 2026, 10:14 AM IST

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