12 लाख में नौकरी का सपना, भोपाल के होटल में मिला लीक पेपर! दो साल से फरार आरोपी आखिरकार गिरफ्तार

समीक्षा अधिकारी और सहायक समीक्षा अधिकारी परीक्षा के पेपर लीक मामले में दो साल से फरार एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। आखिर पेपर कैसे मिला, किसने सौदा कराया और STF को क्या-क्या जानकारी मिली, पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 18 June 2026, 7:19 PM IST
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Lucknow: उत्तर प्रदेश की बहुचर्चित समीक्षा अधिकारी (RO) और सहायक समीक्षा अधिकारी (ARO) प्रारंभिक परीक्षा-2023 के पेपर लीक मामले में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को बड़ी सफलता मिली है। करीब दो साल से फरार चल रहे एक वांछित आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों को इस पूरे नेटवर्क के काम करने के तरीके से जुड़ी कई अहम जानकारियां मिली हैं।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान आलोक मिश्रा के रूप में हुई है, जो मूल रूप से गाजीपुर जिले का रहने वाला है और वर्तमान में मऊ में रह रहा था। STF ने उसे मऊ के मुंशीपुरा इलाके से गिरफ्तार किया।

परीक्षा से पहले ही वायरल हुआ था पेपर

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा 11 फरवरी 2024 को RO/ARO प्रारंभिक परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा शुरू होने से पहले ही प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने की शिकायतें सामने आई थीं। मामला गंभीर होने पर राज्य सरकार ने परीक्षा निरस्त कर दी थी और पूरे प्रकरण की जांच STF को सौंप दी गई थी।

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जांच के दौरान STF ने एक विशेष टीम गठित कर पेपर लीक से जुड़े लोगों की तलाश शुरू की। इसी जांच में कई गिरफ्तारियां पहले भी हो चुकी हैं, जबकि कुछ आरोपी लंबे समय से फरार चल रहे थे।

नौकरी की चाह में फंस गया अभ्यर्थी

पूछताछ में आलोक मिश्रा ने बताया कि उसने और उसके बहनोई कृष्णा पांडेय ने RO/ARO परीक्षा का फॉर्म भरा था। परीक्षा से कुछ सप्ताह पहले वाराणसी में उनकी मुलाकात अमरजीत शर्मा नामक व्यक्ति से हुई। आलोक के मुताबिक, अमरजीत ने दावा किया कि उसके संपर्क ऐसे लोगों से हैं जो परीक्षा का प्रश्नपत्र पहले से उपलब्ध करा सकते हैं। इसके बदले प्रत्येक अभ्यर्थी से 12 लाख रुपये मांगे गए। नौकरी लगने के लालच में दोनों तैयार हो गए और एडवांस के रूप में 3-3 लाख रुपये नकद दे दिए।

भोपाल के होटल में पढ़ाया गया था कथित पेपर

आरोपी ने STF को बताया कि 9 फरवरी 2024 को उसे और उसके बहनोई को भोपाल बुलाया गया। वहां एक होटल में कई अन्य अभ्यर्थी भी मौजूद थे। होटल में कुछ लोगों ने उन्हें सामान्य अध्ययन और हिंदी विषय के प्रश्न और उत्तर पढ़ने के लिए दिए। करीब तीन से चार घंटे तक पढ़ाई कराने के बाद सभी कागजात वापस ले लिए गए और अभ्यर्थियों को परीक्षा देने भेज दिया गया। आलोक का दावा है कि जब उसने वास्तविक परीक्षा दी तो अधिकांश प्रश्न वही थे, जो भोपाल में दिखाए गए थे।

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पहले भी हो चुकी हैं कई गिरफ्तारियां

STF की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर अमरजीत शर्मा, सुभाष प्रकाश, विवेक उपाध्याय समेत कई लोगों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। आलोक के बहनोई कृष्णा पांडेय को भी अप्रैल 2025 में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों के पास से कई अभ्यर्थियों के शैक्षणिक दस्तावेज, बैंक चेक और अन्य महत्वपूर्ण कागजात भी बरामद हुए थे।

STF की कार्रवाई जारी

STF अधिकारियों का कहना है कि पेपर लीक गिरोह के पूरे नेटवर्क की जांच अभी भी जारी है। इस मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। गिरफ्तार आरोपी के खिलाफ प्रयागराज के सिविल लाइंस थाने में दर्ज मुकदमे के तहत धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश, आईटी एक्ट और सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम की विभिन्न धाराओं में कार्रवाई की जा रही है।

Location :  Lucknow

Published :  18 June 2026, 7:19 PM IST

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