हिंदी
उद्यमी कैरव गांधी के अपहरण और उनकी सुरक्षित बरामदगी के बाद पुलिस अब मामले की गंभीर और तार्किक जांच में जुट गई है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान और मुठभेड़ के साक्ष्य अदालत में पेश करने की तैयारी चल रही है।
कैरव गांधी (File Photo)
Jamshedpur: उद्यमी कैरव गांधी के अपहरण और सुरक्षित बरामदगी के बाद पुलिस ने अब इस हाई-प्रोफाइल मामले को कानूनी रूप से मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर दिया है। प्राथमिकता अब ठोस साक्ष्य जुटाकर आरोपियों को अदालत से कड़ी सजा दिलाने की है।
अदालत में बयान और टीआई परेड
जांच के अगले चरण में अपहृत उद्यमी कैरव गांधी का बयान अदालत में दर्ज कराया जाएगा। इसके साथ ही, गिरफ्तार किए गए छह अपहरणकर्ताओं की टेस्ट आइडेंटिफिकेशन (टीआई) परेड मजिस्ट्रेट की निगरानी में कराई जाएगी। इससे आरोपियों की पहचान पूरी तरह पुख्ता हो सकेगी।
मुठभेड़ और साक्ष्यों की बारीकी से जांच
इस मामले में गिरफ्तार आरोपी मोहन कुमार प्रसाद और अर्जुन सिंह पहले ही न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिए गए हैं। पुलिस ने अपहरणकर्ताओं के साथ हुई मुठभेड़ के हर पहलू को बारीकी से रिकॉर्ड किया है।
अनुसंधान अधिकारियों ने घटनास्थल से फिंगरप्रिंट, इस्तेमाल किए गए हथियार और गवाहों के बयान जुटा लिए हैं। मुठभेड़ की वास्तविकता की पुष्टि के लिए वीडियो साक्ष्य भी तैयार किए गए हैं।
2004 के अजय सिंह अपहरण की यादें ताजा
कैरव गांधी के अपहरण ने शहरवासियों को 2004 के अजय सिंह अपहरण कांड की याद दिला दी है। उस वक्त अजय सिंह, फेमिका इंडस्ट्रीज के मालिक, का अपहरण इसी पैटर्न पर हुआ था। दोनों मामलों में अपराधियों ने वाहन की नकली शिनाख्त का इस्तेमाल किया।
2004: हूटर लगी गाड़ी से लोगों को सरकारी वाहन समझाया गया।
2026: आरोपी स्कॉर्पियो पर पुलिस स्टीकर लगाकर उसी रणनीति का सहारा लिया।
दो दशकों बाद भी अपराधियों द्वारा वही पुरानी रणनीति अपनाना शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
पुलिस की कड़ी तैयारी
पुलिस हर मानवीय और तकनीकी पहलू को ध्यान में रखकर केस का अनुसंधान कर रही है। आरोपियों और साक्ष्यों के ब्योरे को अदालत में पेश करने के लिए पूरी रणनीति तैयार की जा रही है ताकि किसी भी कानूनी तकनीकी खामी से बचा जा सके।