15 लाख में हुआ एनकाउंटर का सौदा, गाजियाबाद हत्याकांड में पुलिस की वर्दी पर लगा दाग, इस कांड से पूरे उत्तर प्रदेश में मचा हड़कंप

गाजियाबाद हत्याकांड की जांच में ऐसा खुलासा हुआ है जिसने पुलिस विभाग को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। इनामी आरोपी को बचाने के लिए कथित तौर पर बड़ी रकम की डील, फर्जी पहचान और जेल भेजने का मामला सामने आया है।

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 1 August 2026, 1:52 PM IST
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Ghaziabad: गाजियाबाद के चर्चित हत्या मामले में फरार इनामी आरोपी को कानून के शिकंजे से बचाने के लिए पुलिस के भीतर ही कथित साजिश रचे जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि 15 लाख रुपये की डील के तहत आरोपी को मुठभेड़ जैसी सख्त कार्रवाई से बचाकर फर्जी तरीके से जेल पहुंचा दिया गया। मामले का खुलासा होने के बाद बदायूं पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। बिनावर थाने में तैनात दारोगा बलवीर सिंह को शुक्रवार रात निलंबित कर दिया गया, जबकि पर्यवेक्षण में लापरवाही मिलने पर इंस्पेक्टर अरिहंत सिद्धार्थ को हटाकर पुलिस लाइंस भेज दिया गया है।

हॉर्न बजाने के विवाद में हुई थी हत्या

जानकारी के मुताबिक, 12 जुलाई को गाजियाबाद में हॉर्न बजाने को लेकर हुए विवाद में बाइक सवार विपिन कुमार की हत्या कर दी गई थी। इस वारदात के बाद मुख्य आरोपी सोनू फरार हो गया और बदायूं पहुंच गया। बताया जा रहा है कि यहां उसने अपने रिश्तेदार, जो एक थाने में दारोगा के पद पर तैनात हैं, उनसे मदद मांगी। इसके बाद आरोपी को बचाने के लिए कई स्तर पर संपर्क किए गए और जिले के चार थानों तक बात पहुंची, लेकिन शुरुआत में किसी ने साथ नहीं दिया।

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फर्जी केस बनाकर भेज दिया जेल

आरोप है कि बाद में बिनावर थाने में तैनात दारोगा बलवीर सिंह ने आरोपी को बचाने की योजना तैयार की। 23 जुलाई को सोनू को अवैध तमंचा रखने के आरोप में गिरफ्तार दिखाया गया और कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि उसे फर्जी नाम और पते के साथ जेल भेजा गया। जिससे गाजियाबाद पुलिस उसकी पहचान तक न कर सके और वह हत्या के मामले में तत्काल गिरफ्तारी से बच जाए।

गाजियाबाद पुलिस पहुंची तो खुला राज

इसी दौरान गाजियाबाद पुलिस लगातार आरोपी की लोकेशन ट्रेस कर रही थी। जब टीम बदायूं पहुंची तो जांच में पता चला कि आरोपी पहले ही फर्जी पहचान के साथ जेल भेजा जा चुका है। इसके बाद पूरे मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों तक पहुंची। एडीजी लॉ एंड ऑर्डर के निर्देश पर जांच शुरू हुई और शुक्रवार को गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर ने भी बदायूं की एसएसपी अंकिता शर्मा को पूरे मामले की जानकारी दी।

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जांच में मिलीभगत के मिले संकेत

एसएसपी ने मामले की जांच एसपी सिटी अभिषेक कुमार सिंह को सौंपी। शुरुआती जांच में दारोगा बलवीर सिंह की कथित मिलीभगत सामने आने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। वहीं इंस्पेक्टर अरिहंत सिद्धार्थ को भी पर्यवेक्षण में लापरवाही के आरोप में उनकी जिम्मेदारी से हटाकर पुलिस लाइंस भेज दिया गया।

अब गाजियाबाद पुलिस आरोपी सोनू को रिमांड पर लेकर पूछताछ की तैयारी कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि उसे फर्जी नाम से जेल भेजने की साजिश में और कौन-कौन लोग शामिल थे। इस पूरे मामले की विस्तृत जांच एसपी देहात डॉ. हृदेश कठेरिया को सौंपी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

Location :  Ghaziabad

Published :  1 August 2026, 1:52 PM IST

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