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पुणे की CBI कोर्ट ने बैंक धोखाधड़ी के एक मामले में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारियों और उधारकर्ताओं को दोषी ठहराया और सजा सुनाई। नंदकिशोर खैरनार, रवि भूषण प्रसाद और प्रियंका विस्पुते को तीन साल की सजा और जुर्माना किया गया।
CBI कोर्ट का फैसला
Pune: पुणे की CBI कोर्ट ने 3 जनवरी 2026 को बैंक धोखाधड़ी के एक मामले में बड़ा फैसला सुनाया। इस मामले में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के कर्मचारियों और उधारकर्ताओं को दोषी ठहराते हुए कड़ी सजा दी गई है। कोर्ट ने नंदकिशोर खैरनार (जो उस समय सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, पिंपरी ब्रांच, पुणे के मैनेजर थे), रवि भूषण प्रसाद (जो असिस्टेंट मैनेजर थे), और श्रीमती प्रियंका प्रशांत विस्पुते (सह-उधारकर्ता) को दोषी ठहराया और सजा सुनाई। आरोपी सरकारी कर्मचारियों को तीन साल की कड़ी कैद (RI) और जुर्माना लगाया गया है। वहीं, श्रीमती प्रियंका विस्पुते को दो साल की कड़ी कैद और जुर्माना लगाया गया है।
यह मामला 2016 में तब शुरू हुआ था जब CBI ने आरोपियों के खिलाफ जांच शुरू की थी। CBI ने 17 फरवरी 2016 को राकेश जायसवाल (जो उस समय सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, पिंपरी ब्रांच के AGM थे) और अन्य उधारकर्ताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया था। आरोपियों पर बैंक के नियमों और प्रक्रियाओं का उल्लंघन करने का आरोप था, जिसमें जाली दस्तावेजों के आधार पर बैंक से लोन लिया गया था। इस धोखाधड़ी से बैंक को 24.54 लाख रुपये का नुकसान हुआ था।
जांच के दौरान यह बात सामने आई कि राकेश जायसवाल, नंदकिशोर खैरनार, रवि भूषण प्रसाद और अन्य उधारकर्ताओं ने मिलकर एक आपराधिक साजिश रची थी। इन लोगों ने मिलकर जाली दस्तावेजों के आधार पर 18.75 लाख रुपये का हाउसिंग लोन मंजूर कराया। इस धोखाधड़ी में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के पिंपरी ब्रांच को 24.54 लाख रुपये का नुकसान हुआ था।
माननीय कोर्ट ने ट्रायल के बाद इन आरोपियों को दोषी ठहराया और सजा सुनाई। नंदकिशोर खैरनार और रवि भूषण प्रसाद को तीन साल की कड़ी सजा और 75,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया। वहीं, श्रीमती प्रियंका प्रशांत विस्पुते को दो साल की सजा और 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया। इस मामले में दो आरोपी, राकेश जायसवाल और प्रशांत लक्ष्मण विस्पुते की मृत्यु हो चुकी थी, इसलिए उनके खिलाफ आरोप खत्म कर दिए गए थे।
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CBI ने इस मामले की जांच करते हुए कई साक्ष्य जुटाए और अलग-अलग साजिशों के लिए छह चार्जशीट दायर कीं। कोर्ट ने पाया कि आरोपियों ने आपसी साजिश के तहत बैंक से लोन हासिल करने के लिए जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था, जिससे बैंक को भारी वित्तीय नुकसान हुआ।