साल 2025 में चार बार घटा रेपो रेट, अब RBI की अगली चाल पर टिकी बाजार की नजर; आगे राहत या ब्रेक का संकेत?

RBI ने मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट 5.25% पर बरकरार रखा है। साल 2025 में चार बार कुल 1.25% की कटौती के बाद यह फैसला लिया गया। EMI पर राहत बनी रहेगी और लोन महंगे नहीं होंगे।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 7 February 2026, 11:47 AM IST
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New Delhi: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मौजूदा मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI फिलहाल नहीं बढ़ेगी। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 6 फरवरी को मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक के फैसलों की जानकारी दी।

दिसंबर कटौती के बाद स्थिर रुख

RBI ने इससे पहले दिसंबर 2025 में रेपो रेट में 0.25% की कटौती की थी, जिसके बाद यह 5.25% पर आ गया था। दिसंबर के बाद यह पहली पॉलिसी मीटिंग थी, जिसमें केंद्रीय बैंक ने दरों को स्थिर रखने का फैसला किया। इससे पहले पूरे साल ब्याज दरों में लगातार कटौती देखने को मिली थी।

2025 में चार बार में 1.25% की कटौती

साल 2025 में RBI ने कुल चार बार रेपो रेट में कटौती की, जिससे ब्याज दरें 1.25% तक घटाई गईं। फरवरी 2025 में करीब पांच साल बाद पहली बार दरों में 0.25% की कटौती करते हुए इसे 6.5% से घटाकर 6.25% किया गया। इसके बाद अप्रैल की बैठक में एक बार फिर 0.25% की कटौती की गई। जून में सबसे बड़ी राहत देते हुए 0.50% की कटौती की गई, जबकि दिसंबर में 0.25% की कटौती के बाद रेपो रेट 5.25% पर पहुंच गया।

EMI में राहत (Img- Internet)

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हर दो महीने में होती है MPC की बैठक

RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी में कुल 6 सदस्य होते हैं। इनमें से 3 सदस्य RBI से होते हैं, जबकि 3 सदस्यों की नियुक्ति केंद्र सरकार करती है। MPC की बैठक हर दो महीने में होती है। वित्त वर्ष 2025-26 में कुल 6 मौद्रिक नीति बैठकें प्रस्तावित हैं, जिनमें पहली बैठक 7 से 9 अप्रैल 2025 के बीच हुई थी।

रेपो रेट क्या होता है?

रेपो रेट वह ब्याज दर होती है, जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है। जब रेपो रेट घटता है, तो बैंकों को सस्ते ब्याज पर पैसा मिलता है। इसका फायदा आमतौर पर ग्राहकों को कम ब्याज दर वाले लोन के रूप में दिया जाता है। इसी वजह से रेपो रेट में कटौती का सीधा असर EMI पर पड़ता है।

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महंगाई और इकोनॉमी को संतुलित करने का टूल

रेपो रेट सेंट्रल बैंक का सबसे प्रभावी पॉलिसी टूल माना जाता है। जब महंगाई बढ़ती है, तो RBI दरें बढ़ाकर बाजार में पैसे का प्रवाह कम करता है। वहीं, जब इकोनॉमी सुस्त होती है, तो रेपो रेट घटाकर मनी फ्लो बढ़ाया जाता है, जिससे ग्रोथ को सपोर्ट मिलता है।

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  • New Delhi

Published : 
  • 7 February 2026, 11:47 AM IST

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