त्योहारों से ठीक पहले आम जनता के लिए बड़ी खुशखबरी, इंपोर्ट ड्यूटी घटने से सस्ते हुए खाद्य तेल, जानें नई कीमतें

बढ़ती महंगाई के बीच आम उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने सोयाबीन, पाम और सूरजमुखी तेल पर इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती कर दी है।

Post Published By: Priyam Kashyap
Updated : 24 September 2026, 2:40 PM IST
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New Delhi: बढ़ती महंगाई के बीच केंद्र सरकार ने आम जनता को राहत देने के लिए खाने के तेल पर इंपोर्ट ड्यूटी कम करने का फैसला किया है। इस कदम से सोयाबीन, पाम और सूरजमुखी के तेल की कीमतें कम होने की उम्मीद है। नई दरें गुरुवार, 24 सितंबर से लागू हो गईं।

तीन मुख्य खाने के तेलों पर कस्टम ड्यूटी में कटौती

भारत अपनी खाने के तेल की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इंपोर्ट करता है। इसे देखते हुए, सरकार ने कच्चे और रिफाइंड खाने के तेलों पर बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) में बदलाव किया है। कच्चे सूरजमुखी तेल पर इंपोर्ट ड्यूटी 10 प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दी गई है, जबकि रिफाइंड सूरजमुखी तेल पर ड्यूटी 32.5 प्रतिशत से घटाकर 22.5 प्रतिशत कर दी गई है।

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इसके अलावा कच्चे सोयाबीन तेल और पाम तेल पर कस्टम ड्यूटी 10 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दी गई है, जबकि रिफाइंड सोयाबीन तेल और रिफाइंड पाम तेल पर ड्यूटी 32.5 प्रतिशत से घटाकर 27.5 प्रतिशत कर दी गई है।

त्योहारों के मौसम से पहले ग्राहकों को राहत की उम्मीद

इंडस्ट्री बॉडी, इंडियन वेजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IVPA) ने सरकार के फैसले का स्वागत किया है। IVPA के प्रेसिडेंट सुधाकर देसाई ने कहा कि इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती से इंपोर्ट किए गए तेल की लागत कम हो सकती है, जिससे रिटेल कीमतों पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि त्योहारों के मौसम में बाजार में खाने के तेल की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना इंडस्ट्री के लिए प्राथमिकता है। ड्यूटी में कटौती का सूरजमुखी तेल की कीमतों पर खास तौर पर बड़ा असर पड़ने की उम्मीद है।

सूरजमुखी और सोयाबीन तेल बदल सकते हैं बाजार की स्थिति

IVPA के अनुसार, सूरजमुखी तेल पर सबसे ज्यादा ड्यूटी कटौती की गई है, जिससे यह पहले से ज्यादा सस्ता हो गया है। ग्राहकों खासकर दक्षिण भारत में जहां सूरजमुखी तेल की खपत ज्यादा है को इससे फायदा होने की उम्मीद है। एसोसिएशन का यह भी कहना है कि सोयाबीन और सूरजमुखी तेल का ज्यादा इंपोर्ट पाम तेल की मांग पर असर डाल सकता है।

बढ़ते इंपोर्ट बिल के बीच सरकार का कदम

सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के अनुमानों के अनुसार, मौजूदा मार्केटिंग ईयर में भारत का खाने के तेल का इंपोर्ट बिल लगभग 9 प्रतिशत बढ़कर 1.75 लाख रुपये करोड़ तक पहुंच सकता है, जिसकी वजह ज्यादा इंपोर्ट और रुपये की कीमत में गिरावट है।

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भारत पाम तेल के लिए मुख्य रूप से मलेशिया और इंडोनेशिया पर निर्भर है, जबकि सोयाबीन तेल अर्जेंटीना और ब्राजील से इंपोर्ट किया जाता है। सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब घरेलू बाजार में खाने के तेल की कीमतों को काबू में रखना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

Location :  New Delhi

Published :  24 September 2026, 2:40 PM IST

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