UP Officer Controversy: हाईकोर्ट की सख्ती से तीन IAS अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ीं, जानिए किस आदेश से जुड़ा है पूरा मामला

उत्तर प्रदेश में हालिया दिनों में प्रशासनिक अधिकारियों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। एक तरफ हाईकोर्ट ने वेतन आदेश की अवमानना पर अधिकारियों को तलब किया है, तो वहीं दूसरी ओर दागी अफसरों पर सरकार की कड़ी कार्रवाई जारी है।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 13 October 2026, 3:49 PM IST
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Lucknow: उत्तर प्रदेश में अधिकारियों से जुड़े दो अलग-अलग मामले चर्चा में हैं। एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तीन वरिष्ठ IAS अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करते हुए उन्हें व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है।

वहीं, दूसरे मामले में उत्तर प्रदेश कैडर के तीन IPS अधिकारियों को पहले अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जा चुकी है। दोनों मामलों में अधिकारियों की भूमिका और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर चर्चा हो रही है।

दीपक कुमार, अनिल गर्ग और सौरभ बाबू पर अवमानना की कार्रवाई

अक्टूबर 2026 के हालिया घटनाक्रम के मुताबिक, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने IAS अधिकारी दीपक कुमार, अनिल गर्ग और सौरभ बाबू के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की है। मामला वर्ष 2022 के एक वेतन संबंधी आदेश का पालन नहीं किए जाने से जुड़ा है।

अदालत ने तीनों अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है। इस घटनाक्रम से संबंधित अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में मामले की अगली सुनवाई की तारीख और अदालत के विस्तृत आदेश का उल्लेख नहीं है।

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वेतन संबंधी आदेश के पालन को लेकर मामला

दिए गए विवरण के अनुसार, हाईकोर्ट का मामला वर्ष 2022 में पारित वेतन संबंधी आदेश के अनुपालन से जुड़ा है। अदालत के आदेश का पालन नहीं होने के आरोप के बाद तीन अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की गई।

इस मामले में दीपक कुमार, अनिल गर्ग और सौरभ बाबू के नाम सामने आए हैं। व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिए जाने के बाद मामला प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

तीन IPS अधिकारियों को दी गई थी अनिवार्य सेवानिवृत्ति

उत्तर प्रदेश कैडर के तीन IPS अधिकारियों को भी अनिवार्य सेवानिवृत्ति दिए जाने का मामला सामने आया था। इनमें  राजेश कृष्ण, राकेश शंकर और एक अन्य के नाम शामिल हैं।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार कृष्ण 2002 बैच और राकेश शंकर 2005 बैच के अधिकारी रहे हैं। गृह मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश प्रशासन की सिफारिश पर इन अधिकारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी थी।

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सेवा रिकॉर्ड और विवादों से जुड़े थे मामले

दिए गए विवरण के मुताबिक, अधिकारियों के सेवा रिकॉर्ड की समीक्षा में उन्हें लोक सेवा के लिए अनुपयुक्त पाया गया था। राजेश कृष्ण का नाम पुलिस भर्ती घोटाले और राकेश शंकर का नाम देवरिया शेल्टर होम मामले में संदिग्ध भूमिका के संदर्भ में सामने आया था।  इन मामलों को तीनों अधिकारियों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति से जोड़कर देखा गया।

Location :  Lucknow

Published :  13 October 2026, 3:43 PM IST

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