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प्रतीकात्मक छवि (Source: Pinterest)
Patna: बिहार के लाखों शिक्षकों को राज्यकर्मी का दर्जा तो मिल गया है, लेकिन अब उनका ध्यान अपने वेतन के सबसे बड़े हक यानी '7वें वेतन आयोग' (7th Pay Commission) के पूर्ण लाभ पर टिक गया है।
राज्य के अन्य सरकारी कर्मचारियों की तर्ज पर 7वां वेतनमान न मिलने से शिक्षकों में भारी असंतोष है। 2006 के बाद बहाल नियोजित व विशिष्ट शिक्षकों का तर्क है कि जब जिम्मेदारी और दर्जा एक है, तो वेतन के पे-मैट्रिक्स में यह भेदभाव क्यों?
शिक्षकों की यह मांग अगर मान ली जाती है, तो बिहार के करीब 5.5 लाख शिक्षकों का आर्थिक ढांचा पूरी तरह बदल जाएगा। अनुमान के मुताबिक, पे-मैट्रिक्स में फिट होते ही और महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया (HRA) व यात्रा भत्ता मिलने से हर शिक्षक की टेक-होम सैलरी में सीधे 10,000 से 15,000 रुपये प्रति माह तक की बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, इससे राज्य सरकार के खजाने पर सालाना 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का भारी-भरकम आर्थिक बोझ पड़ेगा।
वेतन में असमानता दूर करने के लिए शिक्षक संगठनों ने अब आर-पार का मन बना लिया है। काली पट्टी बांधकर सांकेतिक विरोध दर्ज कराने के बाद अब शिक्षकों ने गांधी जयंती यानी 2 अक्टूबर से पटना में अनशन शुरू करने की चेतावनी दी है। BPSC-TRE से नियुक्त शिक्षकों और सक्षमता परीक्षा पास विशिष्ट शिक्षकों की एकजुटता ने सरकार की धड़कनें बढ़ा दी हैं।
यह आंदोलन ऐसे मोड़ पर आया है जब बिहार में विधान परिषद की 8 सीटों पर चुनाव होने वाले हैं, जिनमें 4 सीटें सीधे शिक्षक कोटे की हैं। चुनावी माहौल के बीच 5.5 लाख परिवारों से जुड़ा यह मुद्दा सरकार के लिए आसान नहीं रहने वाला है। अब देखना यह है कि क्या नीतीश सरकार चुनाव से पहले शिक्षकों को 7वें वेतनमान का तोहफा देती है या आंदोलन की तपिश झेलती है।
Location : Patna
Published : 7 September 2026, 3:31 PM IST