बिना पेट्रोल डीजल के कैसे दौड़ती है दुनिया की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, जानिए पूरा राज

दुनिया की पहली नैरो-गेज हाइड्रोजन ट्रेन बिना पेट्रोल-डीजल और बिना बिजली के चलकर रेलवे में क्रांति ला रही है। यह ट्रेन ग्रीन हाइड्रोजन से ऊर्जा बनाकर सिर्फ पानी छोड़ती है और प्रदूषण कम करने में बड़ा कदम मानी जा रही है।

Updated : 24 June 2026, 4:29 PM IST
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New Delhi: दुनियाभर में बढ़ते प्रदूषण को कम करने के लिए लगातार नए-नए आविष्कार किए जा रहे हैं। इसी दिशा में रेलवे सेक्टर से एक बड़ी और हैरान करने वाली खबर सामने आई है। स्विट्जरलैंड की मशहूर ट्रेन निर्माता कंपनी स्टैडलर ने दुनिया की पहली नैरो-गेज हाइड्रोजन ट्रेन का सफल विकास किया है। यह ट्रेन न तो पेट्रोल-डीजल पर चलती है और न ही पारंपरिक बिजली पर निर्भर है। यह पूरी तरह ग्रीन हाइड्रोजन से संचालित होने वाली ट्रेन है, जो चलते समय धुएं की जगह केवल पानी की भाप छोड़ती है।

आखिर कैसे चलती है यह हाइड्रोजन ट्रेन?

इस ट्रेन की सबसे खास बात इसका “पावर पैक” है, जो ट्रेन के बीचों-बीच लगाया गया एक विशेष डिब्बा है। इसी में बड़े हाइड्रोजन टैंक और एडवांस्ड फ्यूल सेल्स मौजूद हैं। जब टैंकों से हाइड्रोजन गैस फ्यूल सेल्स में पहुंचती है, तो वहां एक केमिकल रिएक्शन होता है। इस प्रक्रिया के जरिए हाइड्रोजन सीधे बिजली में बदल जाती है। यह बिजली आगे चलकर ट्रेन के नीचे लगी भारी ट्रैक्शन बैटरियों को लगातार चार्ज करती रहती है। यही ऊर्जा ट्रेन को चलाने के लिए शक्ति प्रदान करती है।

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पर्यावरण के लिए बड़ा फायदा

यह ट्रेन उन इलाकों के लिए बेहद उपयोगी मानी जा रही है जहां पहाड़ी या संकरे रास्तों की वजह से बिजली की लाइनें बिछाना मुश्किल होता है और वहां डीजल ट्रेनों का इस्तेमाल करना पड़ता है। कंपनी के अनुसार, इटली के सार्डिनिया में ऐसी केवल 10 हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने से हर साल लगभग 2100 टन से ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन को रोका जा सकता है। इसे प्रदूषण में भारी कमी के रूप में देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि इस ट्रेन में इस्तेमाल होने वाली हाइड्रोजन गैस भी 100% सोलर एनर्जी की मदद से तैयार की जाएगी, जिससे यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल बन जाती है।

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सफर होगा शांत और आरामदायक

नैरो-गेज ट्रेनों को आमतौर पर झटकों और शोर के लिए जाना जाता है, लेकिन इस नई हाइड्रोजन ट्रेन को हल्के और मजबूत एल्युमिनियम मटीरियल से बनाया गया है। इससे सफर ज्यादा स्मूथ और शांत हो जाता है। इसमें न तो इंजन की तेज आवाज होगी और न ही ज्यादा कंपन महसूस होगा। यात्रियों की सुविधा के लिए इसमें बड़ी पैनोरमिक खिड़कियां लगाई गई हैं, जिससे बाहर का नजारा साफ देखा जा सकेगा। इसके अलावा बुजुर्गों और व्हीलचेयर उपयोग करने वाले यात्रियों के लिए इसका फर्श भी नीचा रखा गया है ताकि चढ़ने-उतरने में आसानी हो।

Location :  New Delhi

Published :  24 June 2026, 4:29 PM IST

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