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भारत के 53वें चीफ जस्टिस जस्टिस सूर्यकांत पद संभालने के बाद पहली बार अपने पैतृक गांव पेटवाड़ पहुंचे हैं। उसी सरकारी स्कूल में उनका सम्मान किया जा रहा है, जहां उन्होंने पढ़ाई की थी। इस दौरान गांव में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिल रहा है।
Hansi: भारत के 53वें चीफ जस्टिस, जस्टिस सूर्यकांत ने सीजेआई का पद संभालने के बाद पहली बार अपने पैतृक गांव पेटवाड़ पहुंचे हैं। यह गांव हरियाणा के नवगठित हांसी जिले में स्थित है, जो पहले हिसार जिले का हिस्सा था। इस खास मौके पर उनके सम्मान में एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया है, जिसमें गांव और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए हैं।
जस्टिस सूर्यकांत ने पेटवाड़ गांव के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में छठीं से दसवीं तक की पढ़ाई की थी। इसी स्कूल में आज उनका सम्मान समारोह आयोजित होना गांववासियों के लिए गर्व और भावुकता का क्षण बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसा आमतौर पर बहुत कम देखने को मिलता है कि कोई व्यक्ति देश के सर्वोच्च न्यायिक पद तक पहुंचकर उसी स्कूल में सम्मानित हो, जहां वह कभी छात्र रहा हो।
समारोह के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। स्कूल परिसर और गांव में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिल रहा है। स्कूली बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और युवा, सभी जस्टिस सूर्यकांत के स्वागत के लिए उत्साहित दिखाई दे रहे हैं।
नोडल अधिकारी सुनील शर्मा ने बताया कि समारोह की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। उनके अनुसार, “पूरा गांव इस आयोजन में शामिल है। यह जगह किसी महल जैसी लग रही है। हम सभी जस्टिस साहब की सेवा करके बेहद खुश हैं।”
नोडल अधिकारी ने डाइनामाइट न्यूज़ से हुई खास बातचीत में बताया कि जस्टिस सूर्यकांत का अपने गांव और स्कूल से गहरा जुड़ाव है। वे हर साल पेटवाड़ आते हैं और स्कूल के 10वीं व 12वीं के टॉपर्स को सम्मानित करते हैं। गांव के खेतों में स्थित तालाब से उनकी विशेष भावनात्मक स्मृतियां जुड़ी हैं। वे अक्सर वहां आधे घंटे तक अकेले बैठकर बचपन की यादें ताजा करते हैं। उनके बड़े भाई गांव में रहते हैं, इसी कारण उनका आना-जाना नियमित रहता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि 1979 में इसी स्कूल से पास आउट होने वाले जस्टिस सूर्यकांत ने कभी अपने गांव और जड़ों को नहीं भुलाया। देश के सर्वोच्च न्यायिक पद पर पहुंचने के बाद भी हर साल स्कूल आना और बच्चों को प्रेरित करना उनकी सादगी और जमीन से जुड़े रहने की सोच को दर्शाता है।