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देहरादून के विकास नगर स्थित लेहमन अस्पताल जाने वाले मार्ग पर नो पार्किंग में खड़ी गाड़ियों के कारण एंबुलेंस को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। रोज हजारों मरीजों के आने-जाने के बीच ट्रैफिक अव्यवस्था गंभीर समस्या बन गई है।
विकास नगर में नो पार्किंग बनी मुसीबत
Dehradun: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के विकास नगर क्षेत्र में इन दिनों ट्रैफिक अव्यवस्था बड़ी समस्या बनती जा रही है। खासकर देहरादून के इस इलाके में नेशनल हाईवे से लेहमन अस्पताल की ओर मुड़ने वाले चौक पर नो पार्किंग में खड़ी गाड़ियां एंबुलेंस के लिए गंभीर बाधा बन रही हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार लेमन हॉस्पिटल जाने वाले मार्ग पर तहसील में आने वाले कई लोग अपनी गाड़ियां नो पार्किंग जोन में खड़ी कर देते हैं। यह स्थान मुख्य सड़क से जुड़ा हुआ है और यहां से अस्पताल का सीधा रास्ता जाता है। अवैध पार्किंग के कारण सड़क संकरी हो जाती है और बड़े वाहनों के लिए निकलना मुश्किल हो जाता है।
अस्पताल में रोजाना हजारों की संख्या में मरीज उत्तराखंड के साथ-साथ अन्य प्रदेशों से भी इलाज के लिए पहुंचते हैं। गंभीर मरीजों को लेकर आने वाली एंबुलेंस को इस मार्ग से गुजरना पड़ता है। लेकिन सड़क पर खड़ी गाड़ियों के कारण एंबुलेंस को कई बार रुकना पड़ता है या लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। ऐसे में मरीजों की जान पर भी जोखिम बढ़ जाता है।
नेशनल हाईवे से मुड़ते ही जाम की स्थिति
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नो पार्किंग के बोर्ड लगे होने के बावजूद नियमों का पालन नहीं हो रहा है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मार्ग पर नियमित रूप से ट्रैफिक पुलिस की तैनाती की जाए और अवैध पार्किंग करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो। उनका कहना है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान के आसपास विशेष सतर्कता बरतना बेहद जरूरी है।
अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों और उनके परिजनों को भी ट्रैफिक जाम के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार गंभीर स्थिति में मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता। स्थानीय व्यापारियों और सामाजिक संगठनों ने भी इस समस्या को लेकर प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पताल मार्ग को पूरी तरह नो पार्किंग जोन घोषित कर सख्ती से पालन कराया जाए। साथ ही वैकल्पिक पार्किंग व्यवस्था विकसित की जाए, ताकि तहसील या आसपास आने वाले लोग निर्धारित स्थान पर वाहन खड़े कर सकें। जब तक इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक एंबुलेंस और मरीजों की परेशानी जारी रहने की आशंका है।