Rudranath Temple Opening: आज खुलेंगे चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ के कपाट, जानें क्यों खास है ये धाम

चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ मंदिर के कपाट आज, 18 मई को दोपहर 12:45 बजे ग्रीष्मकाल के लिए खोल दिए जाएंगे। गोपीनाथ मंदिर से रवाना हुई शिव जी की पावन देव डोली पनार बुग्याल होते हुए अपने दिव्य धाम पहुंचेगी। श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 18 May 2026, 10:51 AM IST
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Chamoli: देवभूमि उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के साथ-साथ अब पंच केदार की यात्रा का आध्यात्मिक उत्साह भी अपने चरम पर पहुंच गया है। 'बम-बम भोले' और 'हर-हर महादेव' के गगनभेदी जयघोष के बीच रविवार को चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ की पावन चल विग्रह डोली अपने शीतकालीन गद्दीस्थल गोपीनाथ मंदिर (गोपेश्वर) से मध्य हिमालय क्षेत्र के लिए रवाना हो गई है। डोली के प्रस्थान के समय सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोग और देश-विदेश से आए श्रद्धालु मौजूद रहे।

भक्तों की टोली और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन के साथ देव डोली अपने पहले रात्रि प्रवास के लिए खूबसूरत पनार बुग्याल पहुंच चुकी है। सोमवार यानी 18 मई को यह डोली मुख्य रुद्रनाथ मंदिर परिसर में प्रवेश करेगी, जिसके बाद विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ दोपहर ठीक 12 बजकर 45 मिनट पर मंदिर के कपाट ग्रीष्मकाल के लिए श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे।

पुजारी हरीश भट्ट संभाल रहे हैं पूजा का जिम्मा

प्रशासन और मंदिर समिति की ओर से कपाट खुलने की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस वर्ष रुद्रनाथ मंदिर में मुख्य पूजा-अर्चना का जिम्मा पुजारी हरीश भट्ट संभाल रहे हैं। रविवार तड़के से ही कपाट खुलने की धार्मिक प्रक्रियाओं की शुरुआत की गई, जिसके तहत गोपीनाथ और रुद्रनाथ भगवान की विशेष पूजा-अर्चना और महाअभिषेक किया गया। इसके उपरांत, भगवान रुद्रनाथ की पवित्र देव डोली को स्थानीय और पहाड़ी फूलों से बेहद भव्य तरीके से शृंगारित किया गया। डोली के प्रस्थान करते ही पूरा वातावरण शिवभक्ति के रंग में सराबोर हो गया।

पंच केदार में चौथा स्थान रखता है रुद्रनाथ मंदिर

हिंदू धार्मिक मान्यताओं में रुद्रनाथ मंदिर का एक विशेष और अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। यह पंच केदार (Panch Kedar) के पांच प्रमुख शिव मंदिरों में से चौथा केदार माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाभारत के भीषण युद्ध के बाद पांडव अपने ही भाइयों की हत्या के गोत्र पाप से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव की खोज में हिमालय के इस दुर्गम क्षेत्र में पहुंचे थे। भगवान शिव पांडवों से अत्यधिक नाराज थे, इसलिए वे उनसे छिपने के लिए बैल का रूप धारण कर अंतर्ध्यान हो गए और फिर अलग-अलग पांच स्थानों पर प्रकट हुए।

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मान्यता है कि जिस पावन स्थान पर भगवान शिव का 'मुख' (चेहरा) प्रकट हुआ था, वही स्थान आज रुद्रनाथ मंदिर के नाम से विश्व प्रसिद्ध है। यहाँ भगवान शिव की 'एकानन' यानी केवल मुख रूप में अलौकिक पूजा की जाती है।

3600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है यह कठिन और दिव्य धाम

समुद्र तल से करीब 3600 मीटर की अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर प्राकृतिक सुंदरता, हिमालय की विशालता और आध्यात्मिक ऊर्जा का एक अनूठा संगम है। रुद्रनाथ की यात्रा को पंच केदारों में सबसे कठिन माना जाता है, क्योंकि यहाँ तक पहुँचने के लिए श्रद्धालुओं को लगभग 18 किलोमीटर की बेहद खड़ी और दुर्गम पैदल खड़ी चढ़ाई पार करनी पड़ती है।

यह पूरी यात्रा घने जंगलों, मखमली घास के हरे-भरे बुग्यालों, बर्फ से ढकी चोटियों और बेहद शांत वातावरण से होकर गुजरती है। शिवभक्तों का मानना है कि इस कठिन मार्ग को पार कर यहाँ पहुँचने वाला व्यक्ति केवल शारीरिक रूप से नहीं, बल्कि मानसिक और आत्मिक रूप से भी पूरी तरह शुद्ध हो जाता है।

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भगवान शिव का रौद्र और तपस्वी स्वरूप

रुद्रनाथ मंदिर को भगवान शिव के रौद्र, विरक्त और तपस्वी स्वरूप का प्रतीक माना जाता है। यहाँ का एकांत वातावरण सदियों से साधु-संतों को ध्यान और गहन तपस्या के लिए आकर्षित करता रहा है। धार्मिक मान्यता है कि जो भी भक्त यहाँ सच्चे मन से आकर महादेव के मुख रूप के दर्शन करता है, उसके जीवन के सभी सांसारिक कष्ट और मानसिक तनाव हमेशा के लिए दूर हो जाते हैं।

मुख्य मंदिर परिसर के आसपास कई अन्य पवित्र जलाशय भी स्थित हैं, जिनमें सूर्य कुंड, चंद्र कुंड और ताराकुंड सबसे प्रमुख हैं। कपाट खुलने के साथ ही यहाँ आने वाले श्रद्धालु इन पवित्र कुंडों में स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित करेंगे और बाबा रुद्रनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।

Location :  Chamoli

Published :  18 May 2026, 10:51 AM IST

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