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हल्द्वानी में आर्थिक रूप से कमजोर परिवार को अस्पताल ने शव देने से मना किया। SSP डॉ. मंजुनाथ टीसी की त्वरित कार्रवाई से पुलिस ने मृतका का शव परिजनों को सौंपा। परिवार ने अंतिम संस्कार कर सकी।
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Haldwani: हल्द्वानी में बीती रात एक आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की दुर्दशा ने सबका ध्यान खींचा। अल्मोड़ा के नंदन बिरौड़िया ने SSP नैनीताल डॉ. मंजुनाथ टीसी को फोन कर जानकारी दी कि उनकी पत्नी सीमा बिरौड़िया को बेस अस्पताल अल्मोड़ा से रेफर करने के बाद चंदन हॉस्पिटल हल्द्वानी में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई, लेकिन अस्पताल के प्रबंधक ने अतिरिक्त पैसों की मांग करते हुए शव सौंपने से साफ इंकार कर दिया।
नंदन बिरौड़िया ने बताया कि उन्होंने पहले ही 57 हजार रुपये इलाज के लिए चुकाए थे। इसके बावजूद अस्पताल ने 30 हजार रुपये और मांग लिए। पैसों की कमी के कारण परिवार अपनी पत्नी और मां का अंतिम संस्कार भी नहीं कर पा रहा था। इस दुखद स्थिति ने SSP डॉ. मंजुनाथ टीसी को गहराई से प्रभावित किया और उन्होंने तत्काल कार्रवाई का निर्णय लिया।
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SSP ने CO सिटी हल्द्वानी अमित कुमार और कोतवाली प्रभारी विजय मेहता को निर्देश दिए कि तुरंत चंदन हॉस्पिटल पहुंचकर परिवार की मदद करें। पुलिस टीम तुरंत मौके पर गई और अस्पताल प्रबंधन से बातचीत की। परिजनों की कठिनाई को देखते हुए पुलिस ने मृतका का शव तुरंत परिवार को सौंपा।
साथ ही, पुलिस ने अस्पताल से मृतका का मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कराना सुनिश्चित किया, ताकि परिवार बिना किसी कानूनी अड़चन के अंतिम संस्कार कर सके। SSP ने कहा कि मानवता के खिलाफ ऐसे व्यवहार को किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा।
पुलिस अधिकारियों ने अस्पताल के प्रबंधक को सख्त हिदायत दी कि भविष्य में किसी भी परिस्थिति में मानवता के खिलाफ ऐसा रवैया न अपनाया जाए। इस कदम से पीड़ित परिवार को बड़ी राहत मिली और वे अपनी धार्मिक रीति अनुसार अपनी पत्नी और मां का अंतिम संस्कार कर पाए।
इस घटना ने यह दिखाया कि समय पर की गई पुलिस कार्रवाई और मानवीय दृष्टिकोण गरीब और असहाय परिवारों के लिए कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है। SSP की तत्परता और अधिकारियों के सहयोग से न केवल परिवार को न्याय मिला, बल्कि समाज में एक सकारात्मक संदेश भी गया कि मानवता और संवेदनशीलता हमेशा सर्वोपरि हैं।
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नंदन बिरौड़िया ने पुलिस की इस मदद के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि यदि SSP ने तुरंत कदम नहीं उठाया होता, तो वे अपनी पत्नी और मां का अंतिम संस्कार नहीं कर पाते। परिवार ने अस्पताल की गलतियों के बावजूद राहत की सांस ली और अब वे शांति के साथ अंतिम संस्कार कर सके।