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रुद्रप्रयाग के जखोली विकासखंड में बुधवार को एक तेंदुआ शिकार के दौरान पानी के टेंक में फंस गया। सूचना पर मौके पर पहुंचे ग्रामीण और वन विभाग की टीम ने तेंदुए को रेस्क्यू किया। रेस्क्यू के बाद क्षेत्र में ट्रैप कैमरा और ड्रोन के माध्यम से निगरानी रखी जा रही है।
जखोली में पानी के टैंक में फंसा तेंदुआ
Rudraprayag: जनपद के जखोली विकासखंड स्थित चमराड़ा क्षेत्र में बुधवार को पानी के टैंक में एक तेंदुआ फंस गया। सूचना पाकर वन विभाग की टीम फलई गांव से सटे चमराड़ा क्षेत्र में पहुंची और उसका रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ दिया।
जानकारी के अनुसार एक जंगल से आया एक तेंदुआ शिकार के दौरान पानी के टैंक में गिर गया। टैंक की उंचाई अधिक होने के कारण वह टैंक से बाहर नहीं निकल पाया। सूचना पाकर पहुंची वन विभाग की टीम ने उसे सुरक्षित बाहर निकल कर जंगल में छोड़ दिया। घटना बुधवार की बतायी जा रही है।
Rudraprayag: जखोली में पानी के टैंक में फंसा तेंदुआ
वन विभाग की टीम ने किया रेस्क्यू
जखोली विकासखंड स्थित चमराड़ा क्षेत्र की घटना
शिकार के दौरान फंसा टैंक में #Rudraprayag #LeopardTrapped #WaterTank #ForestDepartmentRescued pic.twitter.com/HsN1CDrVXs— डाइनामाइट न्यूज़ हिंदी (@DNHindi) March 26, 2026
ग्रामीणों ने बताया कि शाही के शिकार के दौरान तेंदुआ खाली पानी के टैंक में फंस गया था। उसके दहाड़ने की आवाज सुनकर वन विभाग को ग्रामीणों ने सूचना दी। सूचना मिलते ही क्विक रिस्पॉन्स टीम मौके पर पहुंची। क्षेत्र की घेराबंदी की गई और लोगों को क्षेत्र से दूर रखा गया। इसके बाद रेस्क्यू रिस्पॉन्स टीम ने अभियान चला कर उसे बाहर निकाला गया।
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उपप्रभागीय वनाधिकारी देवेन्द्र सिंह के निर्देशन में वन क्षेत्राधिकारी सुरेन्द्र नेगी और हरिशंकर रावत की टीम ने सावधानी से तेंदुए को टैंक से बाहर निकाला उसे जंगल में छोड़ दिया। एसडीओ देवेंद्र सिंह पुंडीर ने बताया कि तेंदुआ ढाई से तीन साल का था और पूरी तरह सुरक्षित था। उसे रेस्क्यू कर उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया। वहीं पूरे अभियान के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया गया।
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उन्होंने बताया कि रेस्क्यू के बाद क्षेत्र में ट्रैप कैमरा और ड्रोन के माध्यम से निगरानी रखी जा रही है। वहीं नियमित गश्त और निगरानी की जा रही है।
गौरतलब है कि उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में वन्यजीव और मानव संघर्ष की खबरें सुनाई देती है। तेंदुआ आए दिन मवेशियों को शिकार बनाता है। रिहायशी इलाकों में मवेशियों और कभी-कभी इंसानों पर हमले बढ़े हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में खेती और पशुपालन प्रभावित हो रहा है।