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CJI सूर्यकांत और गृह मंत्री अमित शाह ने तुषार मेहता की किताब का किया लोकार्पण (इमेज सोर्स- डाइनामाइट न्यूज़)
New Delhi: भारत मंडपम में एक भव्य समारोह आयोजित किया गया, जहाँ भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने संयुक्त रूप से भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा लिखी दो किताबें लॉन्च कीं — ‘The Bench, the Bar, and the Bizarre’ और ‘The Lawful and the Awful’।
इस कार्यक्रम में देश भर से जाने-माने न्यायविदों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं, कानूनी विशेषज्ञों और कई विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति रही।
नई दिल्ली में गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा: “विधि के क्षेत्र को लेकर अपने दिल की बात मैं किसी उचित मंच पर अवश्य रखूँगा, यह बात मैं आज ही स्पष्ट कर देना चाहता हूँ। मैं तुषार मेहता जी के पुस्तक लोकार्पण के दिन कोई और ख़बर नहीं बनाना चाहता।”#ChiefJusticeofIndia… pic.twitter.com/J7BMgtOrea
— डाइनामाइट न्यूज़ हिंदी (@DNHindi) May 10, 2026
कार्यक्रम के दौरान सभा को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कानूनी बिरादरी में तुषार मेहता के योगदान की सराहना की और उस साहित्य के महत्व पर प्रकाश डाला जो न्यायिक और कानूनी प्रणाली के अनुभवों को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि ऐसी किताबें अदालतों के कामकाज और कानूनी पेशे के बारे में बहुमूल्य अंतर्दृष्टि प्रदान करती हैं, साथ ही वर्षों के अदालती अनुभव से प्राप्त अद्वितीय दृष्टिकोण भी प्रस्तुत करती हैं।
अपने भाषण के दौरान अमित शाह ने हल्का-फुल्का लेकिन उल्लेखनीय टिप्पणी भी की, जिसमें उन्होंने कहा कि वह भविष्य में किसी उचित मंच पर कानूनी क्षेत्र पर अपने विचार साझा करेंगे। शाह ने कहा कि मैं आज ही यह स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि मैं तुषार मेहता जी की किताब लॉन्च के दिन कोई और सुर्खियाँ नहीं बनाना चाहता," जिस पर दर्शकों में हँसी और तालियों की गड़गड़ाहट गूँज उठी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि मैं अक्सर सोचता था कि क्या होगा यदि कानून कभी किसी कॉमेडी क्लब का चक्कर लगा ले — और सॉलिसिटर जनरल ने ‘The Lawful and The Awful’ और ‘The Bench, The Bar and The Bizarre’ के माध्यम से इसका शानदार जवाब दिया है। इन किताबों को पढ़ना ऐसा लगता है मानो कोई कोर्टरूम ड्रामा सहजता से एक स्टैंड-अप परफॉर्मेंस में बदल गया हो।”
CJI सूर्यकांत ने कहा कि एक ब्रिटिश न्यायाधीश थे, लॉर्ड लीच, जो मद्रास उच्च न्यायालय में कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे थे। एक वकील की जोशीली दलीलों के दौरान, अचानक कोर्टरूम के बाहर एक गधे ने रेंकना शुरू कर दिया था।
अपनी तीखी ज़ुबान और कड़े मिज़ाज के लिए मशहूर लॉर्ड लीच ने चुटकी लेते हुए कहा, ‘सज्जनों, एक बार में एक ही।’ वकील भी उतना ही हाज़िरजवाब था, उसने उस समय चुप रहना ही बेहतर समझा। बाद में, जब जस्टिस लीच फैसला लिखवाना शुरू कर रहे थे, तो गधा एक बार फिर रेंका।
इस मौके का फायदा उठाते हुए, वकील ने विनम्रतापूर्वक जवाब दिया, ‘क्या माई लॉर्ड कृपया अपने शब्दों को दोहराएंगे, क्योंकि गूंज के कारण वे अस्पष्ट हो गए हैं?’
यह समारोह देश की कानूनी और संवैधानिक बिरादरी का एक महत्वपूर्ण जमावड़ा बन गया, जिसमें चर्चाएँ विकसित हो रही न्यायिक प्रणाली, संवैधानिक मूल्यों और लोकतंत्र को मजबूत करने में कानूनी पेशेवरों की भूमिका पर केंद्रित रहीं।
इन दो किताबों का लोकार्पण भारत के कानूनी विमर्श में एक महत्वपूर्ण साहित्यिक योगदान के रूप में देखा गया, जो पाठकों को अदालती अनुभवों, कानूनी चिंतन और कानून की दुनिया से जुड़े दिलचस्प किस्सों का एक अनूठा मिश्रण प्रदान करता है।
Location : New Delhi
Published : 10 May 2026, 8:01 PM IST
Topics : Bharat Mandapam CJI Surya Kant solicitor general tushar mehta’s books Union Home Minister Amit Shah