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मौनी अमावस्या के दिन धर्मनगरी हरिद्वार में श्रद्धालुओं का भारी जमावड़ा देखने को मिला। कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धालु तड़के ब्रह्म मुहूर्त से ही हर की पौड़ी पर गंगा स्नान के लिए पहुंचे। यहां गंगा की पवित्र धारा में स्नान कर श्रद्धालुओं ने दान-पुण्य किया और पितरों को तर्पण भी किया।
आस्था का महासंगम
Haridwar: मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर धर्मनगरी हरिद्वार पूरी तरह भक्ति और आस्था के रंग में रंगी नजर आई। कड़ाके की ठंड और शीतल हवाओं के बीच भी श्रद्धालुओं का उत्साह तनिक भी कम नहीं हुआ। तड़के ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालु हर की पौड़ी सहित विभिन्न गंगा घाटों पर पहुंचने लगे और मां गंगा में पुण्य स्नान कर अपने जीवन को धन्य किया।
हर की पौड़ी स्थित ब्रह्मकुंड हर-हर गंगे और जय मां गंगे के दिव्य जयकारों से गूंज उठा। जैसे ही श्रद्धालुओं ने गंगा की पावन धारा में आस्था की डुबकी लगाई, पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। घाटों पर श्रद्धा, संयम और अनुशासन का अनुपम दृश्य देखने को मिला। श्रद्धालु पूरे विधि-विधान और भाव के साथ स्नान, दान और तर्पण करते नजर आए।
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मौनी अमावस्या के दिन मौन, दान और पितृ तर्पण का विशेष महत्व माना जाता है। इसी विश्वास के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण किया और पुण्य लाभ अर्जित किया। कई श्रद्धालु मौन व्रत रखकर गंगा स्नान करते दिखे। जिससे पर्व की आध्यात्मिक गरिमा और भी बढ़ गई।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस पूरी तरह मुस्तैद रही। घाटों और प्रमुख मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था। सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के माध्यम से लगातार निगरानी की जाती रही, ताकि श्रद्धालु निर्भय होकर मां गंगा की शरण में आ सकें। यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए विशेष ट्रैफिक प्लान भी लागू किया गया।
दिनभर हरिद्वार में भक्ति, सेवा और सुरक्षा का सुंदर समन्वय देखने को मिला। ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं के चेहरों पर आस्था की चमक साफ नजर आ रही थी। मौनी अमावस्या के इस पावन स्नान पर्व ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जब बात श्रद्धा की होती है। मौसम और कठिनाइयां भी आस्था के आगे नतमस्तक हो जाती हैं।