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कालाढूंगी के पत्तापानी गांव के गन्ने के खेत में मादा गुलदार का शव मिलने से क्षेत्र में भय फैल गया। वन विभाग ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा, गश्त तेज की और ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी।
मादा गुलदार का शव
Ramnagar: कालाढूंगी के पत्तापानी गांव में बुधवार की रात हड़कंप मच गया जब गन्ने के खेत में 5 वर्षीय मादा गुलदार का शव पाया गया। ग्रामीणों ने शव देखकर तुरंत वन विभाग को सूचना दी। सूचना मिलते ही तराई पश्चिमी वन प्रभाग, रामनगर की बेलपड़ाव रेंज टीम मौके पर पहुंची और पूरे क्षेत्र में सघन तलाशी और जांच अभियान शुरू कर दिया।
पत्तापानी ग्रामसभा के ग्रामीणों ने बताया कि बीते कुछ समय से क्षेत्र में गुलदार के गुर्राने की आवाजें सुनाई दे रही थीं। इसी सूचना के आधार पर वन विभाग ने क्षेत्र में गश्त तेज की। गश्त के दौरान देर रात गन्ने के खेत में गुलदार का शव बरामद किया गया।
तराई पश्चिमी के एसडीओ किरन ग्वासाकोटी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में मादा गुलदार के शरीर पर कई गहरे घाव और चोट के निशान मिले हैं। इन निशानों के आधार पर आशंका जताई जा रही है कि गुलदार की मौत आपसी संघर्ष या अन्य वन्यजीव से टकराव के कारण हुई हो सकती है। हालांकि, मृत्यु का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
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वन विभाग ने गुलदार के सभी अंग सुरक्षित कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए हैं। शव को कब्जे में लेकर कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई। साथ ही आसपास के क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि किसी अन्य वन्यजीव की गतिविधियों या संभावित खतरे से ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
वन विभाग ने की कार्रवाई
इस घटना के बाद पत्तापानी और आसपास के गांवों में भय का माहौल है। वन विभाग ने ग्रामीणों से सतर्क रहने, अकेले खेतों में न जाने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना देने की अपील की है। विभाग ने आश्वासन दिया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
वन विभाग की टीम अब भी पूरे इलाके में लगातार गश्त कर रही है। गन्ने के खेत, जंगल के पास के मार्ग और ग्रामीण आवासों के आसपास विशेष निगरानी रखी जा रही है। एसडीओ किरन ग्वासाकोटी ने कहा कि किसी भी वन्यजीव से संबंधित घटनाओं में प्राथमिकता हमेशा मानव और वन्यजीव दोनों की सुरक्षा रहती है।
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इस घटना ने एक बार फिर यह रेखांकित किया है कि वन्यजीव संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन कितने महत्वपूर्ण हैं। ग्रामीणों को वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार और सुरक्षा उपायों के प्रति जागरूक करना भी वन विभाग की प्राथमिकता है।