हरिद्वार पुलिस पर उठे सवाल: बाहरी एजेंसियां करती रहीं कार्रवाई, स्थानीय पुलिस को नहीं लगी भनक

हरिद्वार में आतंकवाद और नशा तस्करी से जुड़े कई मामलों में बाहरी एजेंसियों ने कार्रवाई कर आरोपियों को पकड़ा, जबकि स्थानीय पुलिस को इसकी जानकारी तक नहीं थी। लगातार सामने आ रही घटनाओं ने पुलिस के खुफिया नेटवर्क और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 31 May 2026, 10:18 AM IST

Haridwar: धार्मिक और सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील माने जाने वाले हरिद्वार जिले में पुलिस की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। बीते कुछ वर्षों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें दूसरे राज्यों की पुलिस या केंद्रीय एजेंसियों ने जिले में कार्रवाई कर बड़े अपराधियों और संदिग्धों को गिरफ्तार किया, लेकिन स्थानीय पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लग सकी। इन घटनाओं ने हरिद्वार पुलिस के खुफिया नेटवर्क और सूचना तंत्र की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

संवेदनशील जिले में सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता

हरिद्वार देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है, जहां सालभर लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसके अलावा जिले में औद्योगिक गतिविधियां और बड़े धार्मिक आयोजन भी लगातार होते रहते हैं। ऐसे में यहां की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र का मजबूत होना बेहद जरूरी माना जाता है। बावजूद इसके, कई मामलों में स्थानीय पुलिस की सक्रियता अपेक्षित स्तर पर दिखाई नहीं दी है।

आतंकी गतिविधियों से जुड़े मामलों ने बढ़ाई चिंता

पिछले वर्षों में आतंकवादी संगठनों से जुड़े संदिग्धों की गिरफ्तारी के कई मामले सामने आए हैं। वर्ष 2016 में अर्धकुंभ के दौरान आतंकी संगठन से जुड़े तीन युवकों को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने हिरासत में लिया था। उस समय स्थानीय पुलिस को इस कार्रवाई की कोई पूर्व जानकारी नहीं थी। मामला सामने आने के बाद पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठे थे।

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नशा तस्करों पर भी बाहरी एजेंसियों की कार्रवाई

केवल आतंकवाद ही नहीं, बल्कि अंतरराज्यीय नशा तस्करी के मामलों में भी पंजाब और दिल्ली पुलिस कई बार हरिद्वार और आसपास के क्षेत्रों से आरोपियों को पकड़कर ले जा चुकी है। ऐसे मामलों में भी स्थानीय पुलिस की भूमिका अक्सर बाद में जानकारी जुटाने और औपचारिक बयान जारी करने तक सीमित दिखाई दी। इससे जिले में पुलिस के मुखबिर तंत्र की प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं।

हालिया मामलों ने बढ़ाई मुश्किलें

हाल ही में कलियर क्षेत्र के आसफनगर से एक युवती को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कथित टेरर फंडिंग मामले में हिरासत में लिया। जांच में उसके पाकिस्तानी हैंडलर से संपर्क होने की बात सामने आई। वहीं रुड़की के ढंडेरा निवासी एक युवक को सहारनपुर पुलिस ने आतंकी संगठन से जुड़े होने के संदेह में पकड़ा। इन मामलों ने यह संकेत दिया कि स्थानीय स्तर पर संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी में कहीं न कहीं कमी रह गई।

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खुफिया नेटवर्क मजबूत करने की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिस की सबसे बड़ी ताकत उसका स्थानीय सूचना तंत्र और मुखबिर नेटवर्क होता है। यदि बाहरी एजेंसियां लगातार जिले में कार्रवाई कर रही हैं और स्थानीय पुलिस को पहले से जानकारी नहीं मिल रही, तो यह सुरक्षा व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। ऐसे में हरिद्वार पुलिस को अपने खुफिया नेटवर्क को और मजबूत करने तथा स्थानीय स्तर पर निगरानी तंत्र को प्रभावी बनाने की जरूरत है।

Location :  Haridwar

Published :  31 May 2026, 10:18 AM IST