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विकास भवन में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने गोट वैली योजना के लाभार्थियों से सीधा संवाद किया। योजना के तहत 127 लाभार्थियों के खातों में धनराशि हस्तांतरित की गई। जानिए, इस संवाद में क्या खुलासा हुआ और प्रशासन ने क्या कदम उठाए!
जिलाधिकारी प्रतीक जैन का सीधा संवाद
Rudraprayag: विकास भवन सभागार में जिलाधिकारी प्रतीक जैन की अध्यक्षता में पशुपालन विभाग द्वारा विभिन्न विभागीय योजनाओं, विशेषकर गोट वैली योजना, के अंतर्गत चयनित लाभार्थियों के साथ एक सीधा संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की स्थिति का मूल्यांकन करना और लाभार्थियों से फीडबैक प्राप्त करना था।
कार्यक्रम के दौरान गोट वैली योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए चयनित 127 लाभार्थियों के बैंक खातों में धनराशि स्थानांतरित की गई। जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने इस अवसर पर कहा कि गोट वैली योजना और अन्य पशुपालन विभाग की योजनाएँ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उनका मानना था कि इन योजनाओं से पशुपालकों की आय में वृद्धि हो रही है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन रहे हैं और उनका जीवनस्तर सुधर रहा है।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग करें ताकि अधिक से अधिक पात्र लाभार्थियों को इन योजनाओं से जोड़ा जा सके और उनका लाभ समय पर पहुँचे। उन्होंने यह भी कहा कि प्रगतिशील पशुपालकों की सफलता अन्य लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है, और प्रशासन की कोशिश है कि हर एक पात्र व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुँच सके।
गोट वैली योजना
कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र सिंह रावत ने भी पशुपालन विभाग की विभिन्न योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन योजनाओं का उद्देश्य पशुपालकों को सुविधाएँ और वित्तीय सहायता प्रदान कर उनके व्यवसाय को बढ़ावा देना है। इस दौरान उन्होंने योजनाओं के धरातलीय क्रियान्वयन को लेकर लाभार्थियों से संवाद किया और उनकी राय ली।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. आसीस रावत ने गोट वैली योजना से जुड़ी विभिन्न योजनाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने विभागीय योजनाओं से लाभान्वित कुछ प्रगतिशील पशुपालकों का परिचय भी कराया, जिनकी सफलता की कहानियाँ दूसरों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकती हैं। इन सफलताओं को लाभार्थियों ने खुद अपनी जुबानी साझा किया, जिससे अन्य पशुपालकों को भी योजनाओं का लाभ उठाने का प्रोत्साहन मिला।