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जनपद गोरखपुर में ऑपरेशन कनविक्शन अभियान के तहत पीड़िता को न्याय मिला है। यह फैसला न केवल पीड़ित को न्याय दिलाने वाला है, बल्कि समाज में कानून के प्रति भरोसे को भी और मजबूत करता है। इस गंभीर मामले में कोर्ट ने अभियुक्त को दोषी ठहराते हुए कड़ा दंड सुनाया है।
गोरखपुर में दुष्कर्म के दोषी को मिला कड़ा दंड
Gorakhpur: जनपद गोरखपुर में ऑपरेशन कनविक्शन अभियान के तहत पीड़िता को न्याय मिला है। वर्ष 2018 में थाना शाहपुर पर पंजीकृत दुष्कर्म के गंभीर मामले में कोर्ट ने अभियुक्त को दोषी ठहराते हुए कड़ा दंड सुनाया है। यह फैसला पुलिस की प्रभावी विवेचना, सतत निगरानी और अभियोजन पक्ष की मजबूत पैरवी का परिणाम माना जा रहा है।
पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश द्वारा अपराधियों को न्यायालय से सजा दिलाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे “ऑपरेशन कनविक्शन” अभियान के क्रम में पुलिस उप महानिरीक्षक/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जनपद गोरखपुर के निर्देशन में इस प्रकरण की लगातार मॉनिटरिंग की गई। थाने के पैरोकार एवं मॉनिटरिंग सेल द्वारा साक्ष्यों को सुदृढ़ ढंग से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जिससे अभियोजन पक्ष का मामला मजबूत हुआ।
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मामले के अनुसार थाना शाहपुर जनपद गोरखपुर पर मु0अ0सं0 184/2018 अंतर्गत धारा 376, 363, 366 भारतीय दंड संहिता तथा धारा 4 पॉक्सो एक्ट के तहत अभियुक्त मनीष निषाद पुत्र राजेश निषाद, निवासी नौसढ़, थाना बेलीपार, जनपद गोरखपुर के विरुद्ध अभियोग पंजीकृत किया गया था। विवेचना पूर्ण होने के उपरांत प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन रहा।
अपर सत्र न्यायाधीश, पॉक्सो कोर्ट संख्या-04, जनपद गोरखपुर ने उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयान और अभियोजन की दलीलों के आधार पर अभियुक्त मनीष निषाद को अपराध का दोषी पाया। न्यायालय द्वारा अभियुक्त को 10 वर्ष के कारावास तथा 20,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया। न्यायालय के इस निर्णय से यह स्पष्ट संदेश गया है कि महिलाओं और नाबालिगों के विरुद्ध किए गए जघन्य अपराधों पर कानून सख्ती से कार्रवाई करता है।
इस प्रकरण में अभियोजन पक्ष की ओर से अपर जिला शासकीय अधिवक्ता (ADGC) श्री सुजीत कुमार शाही एवं विशेष लोक अभियोजक (SPP) श्री उमेश मिश्रा का उल्लेखनीय योगदान रहा। उनकी प्रभावी और निरंतर पैरवी के कारण अभियुक्त को सजा दिलाना संभव हो सका।
जनपद गोरखपुर पुलिस ने इस निर्णय को “ऑपरेशन कनविक्शन” की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि आगे भी गंभीर अपराधों में दोषियों को सजा दिलाने के लिए सशक्त विवेचना और प्रभावी पैरवी जारी रहेगी। यह फैसला न केवल पीड़ित को न्याय दिलाने वाला है, बल्कि समाज में कानून के प्रति भरोसे को भी और मजबूत करता है।