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जिले की बालिकाओं के बेहतर स्वास्थ्य और पोषण को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग ने एक अहम पहल की है। गोरखपुर जनपद के सभी कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में ‘बालिका समृद्धि पखवाड़ा’ के तहत विशेष स्वास्थ्य जांच अभियान चलाया जाएगा। पढिए पूरी खबर
‘बालिका समृद्धि पखवाड़ा’
गोरखपुर: जिले की बालिकाओं के बेहतर स्वास्थ्य और पोषण को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग ने एक अहम पहल की है। गोरखपुर जनपद के सभी कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में ‘बालिका समृद्धि पखवाड़ा’ के तहत विशेष स्वास्थ्य जांच अभियान चलाया जाएगा। यह अभियान 16 से 24 जनवरी तक संचालित होगा, जिसमें छात्राओं की शत-प्रतिशत स्वास्थ्य जांच, उपचार, दवाएं और परामर्श की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इस दौरान छात्राओं को जूनियर पिंक कार्ड भी जारी किए जाएंगे।
यह निर्णय जिला स्वास्थ्य समिति (डीएचएस) की कार्यकारी निकाय की बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश झा ने की। बैठक में सीएमओ ने सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को अभियान को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए।
कस्तूरबा विद्यालयों में जाकर छात्राओं की स्वास्थ्य जांच
सीएमओ डॉ. राजेश झा ने बताया कि प्रत्येक ब्लॉक की राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की टीम कस्तूरबा विद्यालयों में जाकर छात्राओं की स्वास्थ्य जांच करेगी। जांच के दौरान हीमोग्लोबिन स्तर, आंखों की जांच सहित अन्य सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण किए जाएंगे। स्वास्थ्य जांच के बाद जारी होने वाले जूनियर पिंक कार्ड के माध्यम से साप्ताहिक आयरन-फोलिक एसिड सप्लीमेंटेशन की निगरानी की जाएगी, ताकि किशोरियों में एनीमिया की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके और उन्हें सम्पूर्ण पोषण मिल सके।
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लापरवाही बरतने वाली आशाओं के खिलाफ कार्रवाई
बैठक में सीएमओ ने आगामी खिचड़ी मेला को ध्यान में रखते हुए सभी चिकित्सालयों को 24 घंटे आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में इलाज और संसाधनों की कमी नहीं होनी चाहिए। साथ ही सभी आशा कार्यकर्ताओं के भुगतान समय से सुनिश्चित कराने पर भी विशेष जोर दिया गया। जननी सुरक्षा योजना के तहत संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए सीएमओ ने आशा कार्यकर्ताओं की क्लस्टर स्तर पर बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए। कार्य में लापरवाही बरतने वाली आशाओं के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए गए। इसी प्रकार एचबीएनसी और एचबीवाईसी कार्यक्रमों में कम भ्रमण करने वाली आशाओं पर भी कार्रवाई के संकेत दिए गए।
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एनसीडी कार्यक्रम के अंतर्गत सभी सीएचओ, एएनएम, आशा और चिकित्सकों की नियमित समीक्षा के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही प्रत्येक ब्लॉक से कम से कम पांच स्वास्थ्य इकाइयों को एनक्वास प्रमाणन के लिए तैयार करने को कहा गया। बुखार के मरीजों को ईटीसी में भर्ती कर उचित उपचार और जांच के लिए सैंपल जनपद स्तर पर भेजने के निर्देश भी दिए गए। स्वास्थ्य विभाग की यह पहल जिले की बालिकाओं के स्वास्थ्य को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है।