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उत्तर प्रदेश में बरेली जनपद के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने सोमवार को अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे ने नई बहस को जन्म दे दिया है
बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री
Bareilly: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नये नियमों को लेकर चर्चाओं का बाजार गरम है। इन्हीं नियमों के कारण उत्तर प्रदेश में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने सोमवार को अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
बताया जाता है कि UGC नियमों पर नाराजगी जताते हुए अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा दिया।
सूत्रों के अनुसार, अलंकार अग्निहोत्री अपने इस्तीफे के पीछे धार्मिक आस्था से जुड़ी नाराजगी और कुछ सरकारी नीतियों के विरोध को कारण बता रहे हैं। बताया जा रहा है कि वे प्रयागराज माघ मेले के दौरान जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिष्यों के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार से गहरे आहत थे। उन्होंने इस घटना को ब्राह्मण समाज के अपमान से जोड़ते हुए अपनी असहमति सार्वजनिक रूप से जाहिर की थी।
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इस्तीफा देने से कुछ घंटे पहले ही सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने सोशल मीडिया पर एक तीखी और विवादित पोस्ट साझा की थी। इस पोस्ट में उन्होंने यूजीसी (UGC) से जुड़े एक फैसले का विरोध करते हुए उसे “काला कानून” बताया और “काला कानून वापस लो” तथा “Boycott BJP” जैसे नारों का इस्तेमाल किया। उनकी यह पोस्ट कुछ ही समय में सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई।
एक कार्यरत सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा न केवल सरकार की नीतियों के खिलाफ खुलकर बोलना, बल्कि सीधे इस्तीफा देना, प्रशासनिक इतिहास में दुर्लभ माना जा रहा है। अलंकार अग्निहोत्री को अब तक एक सख्त, अनुशासित और निर्णय लेने वाले अधिकारी के रूप में जाना जाता था। ऐसे में उनका अचानक यह कदम शासन के लिए भी चिंता का विषय बन गया है।
फिलहाल, उनके इस्तीफे को लेकर सरकारी स्तर पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि शासन इस पूरे मामले की गंभीरता से समीक्षा कर रहा है। वहीं, राजनीतिक हलकों में इसे आने वाले समय में बड़े विवाद की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।
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अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह केवल व्यक्तिगत आस्था और विरोध का मामला है, या फिर इसके पीछे कोई गहरी प्रशासनिक और राजनीतिक असहमति छिपी हुई है। आने वाले दिनों में शासन की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी।