DN Exclusive: प्रधान का राज खत्म, फिर भी कुर्सी बरकरार! UP के गांवों में बिना चुनाव कैसे चल रही सरकार?

पंचायत चुनाव टलने के बीच योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो चुका है,ऐसे में ग्राम पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने के बाद भी कई गांवों में सत्ता की तस्वीर पूरी तरह नहीं बदली है। चुनाव का इंतजार कर रहे ग्रामीणों के बीच बड़ा सवाल यह है पढ़ें पूरी खबर

Updated : 28 May 2026, 5:20 PM IST
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Panchayat Election News: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव टलने के बीच योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने मौजूदा ग्राम प्रधानों की मांग स्वीकार करते हुए नए चुनाव होने तक ग्राम पंचायतों का प्रशासनिक जिम्मा वर्तमान पंचायतों को सौंपने का निर्णय लिया है।

पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त

प्रदेश में मौजूदा पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो चुका है, लेकिन नई पंचायतों के गठन तक गांवों का कामकाज नहीं रुकेगा। सीएम योगी के फैसले के मुताबिक, मौजूदा ग्राम प्रधान ही पंचायतों के सामान्य कार्यों का संचालन करते रहेंगे। यह व्यवस्था नई ग्राम पंचायतों के गठन तक या अधिकतम छह महीने तक लागू रहेगी। हालांकि, मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए पंचायत चुनाव अब विधानसभा चुनाव के बाद, यानी मार्च के बाद कराए जाने की संभावना जताई जा रही है।

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ग्रामीणों के बीच बड़ा सवाल

ऐसे में ग्राम पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने के बाद भी कई गांवों में सत्ता की तस्वीर पूरी तरह नहीं बदली है। चुनाव का इंतजार कर रहे ग्रामीणों के बीच बड़ा सवाल यह है कि जब प्रधानों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, तो गांवों का कामकाज आखिर किसके भरोसे चल रहा है? कई जगहों पर पूर्व प्रधानों या प्रशासनिक व्यवस्था के जरिए पंचायत के काम जारी हैं, जिससे गांव की राजनीति और लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

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पंचायत चुनाव में देरी का असर

एक ओर समर्थकों का कहना है कि विकास कार्य और सरकारी योजनाएं बाधित न हों, इसलिए अनुभवी लोगों के हाथ में जिम्मेदारी रहना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर लोग सवाल उठा रहे हैं कि बिना नए जनादेश के पुरानी व्यवस्था कितने समय तक जारी रह सकती है। सड़क, नाली, आवास, मनरेगा और पंचायत से जुड़े अन्य काम सीधे गांव की सरकार पर निर्भर करते हैं, ऐसे में पंचायत चुनाव में देरी का असर विकास कार्यों और स्थानीय राजनीति दोनों पर पड़ता दिख रहा है। ऐसे में सवाल चुनाव का ही नहीं बल्कि गांवों में लोकतंत्र सत्ता संतुलन का भी बनता जा रहा।

Location :  Lucknow

Published :  28 May 2026, 4:52 PM IST

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