यूपी में NPA का बड़ा विस्फोट: एक लाख करोड़ रुपये डूबे, कृषि क्षेत्र में वित्तीय तबाही, 41.73 लाख से अधिक ऋण खाते बंद या डिफॉल्ट

उत्तर प्रदेश में बैंकों का 1 लाख करोड़ रुपये कर्ज NPA हो चुका है। कृषि क्षेत्र में हर आठवां लोन डूबने से 33,748 करोड़ रुपये फंसे हैं। तहसीलों में 17,856 करोड़ रुपये की वसूली लंबित है, जिससे बैंकिंग तंत्र और किसानों पर दबाव बढ़ गया है।

Updated : 24 July 2026, 9:57 AM IST
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Lucknow: उत्तर प्रदेश की बैंकिंग प्रणाली इस समय एक बड़े वित्तीय संकट से जूझ रही है। प्रदेश में बैंकों का करीब एक लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम कर्ज एनपीए (गैर-निष्पादित परिसंपत्ति) में तब्दील हो चुका है। रिजर्व बैंक और राज्य सरकार को सौंपी गई संयुक्त रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 तक कृषि, एमएसएमई और प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्रों में कुल 99,481 करोड़ रुपये का ऋण डूब चुका है। आंकड़ों का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि इन क्षेत्रों के 41.73 लाख से अधिक ऋण खाते बंद या डिफॉल्ट की श्रेणी में आ चुके हैं।

कृषि क्षेत्र में सबसे बुरी स्थिति: हर 8वां लोन बना एनपीए

रिपोर्ट से उजागर हुए तथ्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की घटती कर्ज चुकाने की क्षमता पर बड़ा सवाल खड़ा करते हैं। प्रदेश में सबसे गंभीर स्थिति कृषि क्षेत्र की है, जहां बैंकों द्वारा बांटे गए कुल ऋण का 12.97 प्रतिशत हिस्सा डूब चुका है। आसान शब्दों में कहें तो कृषि क्षेत्र में दिया गया लगभग हर आठवां रुपया (8 में से 1 लोन) एनपीए बन चुका है।

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कुल वितरित कृषि ऋण: 2,60,154 करोड़ रुपये

फंसा हुआ एनपीए कर्ज: 33,748 करोड़ रुपये

एनपीए कृषि खाते: 30,12,365 (जो कुल एनपीए खातों का करीब 72% है)

एमएसएमई और प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्रों का हाल

कारोबारी और अन्य प्राथमिक क्षेत्रों की स्थिति भी पूरी तरह से चिंतामुक्त नहीं है, हालांकि कृषि के मुकाबले यहां का आंकड़ा थोड़ा कम है।

एमएसएमई (MSME) क्षेत्र: इस क्षेत्र में बैंकों का कुल 3,02,481 करोड़ रुपये का ऋण बकाया है। इसमें से 15,070 करोड़ रुपये एनपीए हो चुका है, जो कुल बकाया कर्ज का 4.98 प्रतिशत है। इस सेक्टर के 9,47,156 ऋण खाते गैर-निष्पादित हैं।

प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र: इस सेक्टर में कुल 50,663 करोड़ रुपये की राशि एनपीए घोषित की जा चुकी है, जो कि 6.81 प्रतिशत के स्तर पर है।

कुल एनपीए खातों की हिस्सेदारी पर नजर डालें तो इसमें कृषि क्षेत्र का दबदबा (लगभग 72%) सबसे ज्यादा है, जबकि एमएसएमई की हिस्सेदारी करीब 23 प्रतिशत है।

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वसूली की धीमी रफ्तार: तहसीलों में फंसे 17,856 करोड़ रुपये

एनपीए के इस विशाल आंकड़े के बीच बैंकों के लिए फंसे हुए पैसों की रिकवरी करना एक पहाड़ जैसी चुनौती साबित हो रहा है।

बड़ी देनदारी: तहसील स्तर पर वर्तमान में 9,32,565 वसूली प्रमाणपत्र (Recovery Certificates) लंबित पड़े हुए हैं। इनके जरिए बैंकों की करीब 17,856.36 करोड़ रुपये की मोटी देनदारियां फंसी हुई हैं, जिनकी निकासी न हो पाने से बैंकों का वित्तीय संतुलन प्रभावित हो रहा है।

Location :  Lucknow

Published :  24 July 2026, 9:57 AM IST

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