UP Assembly Election 2027: बदलते समीकरणों का अल्टीमेटम: यूपी चुनाव से पहले सीट बंटवारे को लेकर मची रस्साकशी का अंदरूनी सच

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले एनडीए और 'इंडिया' गठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर सियासी घमासान शुरू हो गया है। सपा और कांग्रेस के बीच मजबूत हिस्सेदारी को लेकर खींचतान जारी है, वहीं छोटे दलों के तेवरों ने चुनावों को बेहद दिलचस्प बना दिया है।

Updated : 24 August 2026, 11:01 AM IST
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Lucknow: उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही राज्य की राजनीतिक जमीन पर बड़े बदलाव और खींचतान देखने को मिलने लगी है। सत्ताधारी एनडीए (NDA) और विपक्षी 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के छोटे-बड़े दल एक-दूसरे को सियासी दांवपेच में उलझाने की जुगत में जुट गए हैं। सीटों के बंटवारे को लेकर मची इस रस्साकशी ने चुनावी पारे को अभी से काफी गर्म कर दिया है।

सहयोगियों के बीच दबाव और बयानबाजी

राजनीतिक गलियारों में इस समय जुबानी जंग तेज हो चुकी है। समाजवादी पार्टी (SP) के प्रमुख अखिलेश यादव ने हाल ही में एनडीए के भीतर सीट बंटवारे को लेकर एक बड़ा दावा किया, जिसके तहत उन्होंने संकेत दिया कि भाजपा को अपने सहयोगियों- सुभासपा, रालोद, निषाद पार्टी और अपना दल (एस) के लिए बड़ी संख्या में सीटें छोड़नी पड़ सकती हैं। सपा की इस रणनीति का मकसद एनडीए खेमे में आपसी खींचतान को बढ़ावा देना और मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना है। हालांकि, एनडीए के घटक दलों ने इस पर तीखा पलटवार करते हुए सपा को पहले अपना घर संभालने की सलाह दी है।

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एनडीए खेमे में सीटों की नई दावेदारी

एनडीए के भीतर भी सब कुछ सामान्य नहीं, बल्कि सीटों के आंकड़े को लेकर मोलभाव जारी है। राष्ट्रीय लोक दल (RLD) प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी तथा सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर जैसे नेता अपनी जमीनी पकड़ और पिछले प्रदर्शन के आधार पर मजबूत हिस्सेदारी चाहते हैं। दूसरी ओर, बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर रखते हुए पुराने गठबंधनों के कड़वे अनुभवों का हवाला दिया है, जिससे चुनावी समीकरण और अधिक त्रिकोणीय व पेचीदा नजर आने लगे हैं।

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'इंडिया' गठबंधन में कांग्रेस का बदला तेवर

विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन के भीतर कांग्रेस इस बार किसी भी तरह के एकतरफा समझौते के मूड में नहीं है। संसद से लेकर सड़क तक आक्रामक तेवर और हालिया राजनीतिक गतिविधियों से उत्साहित कांग्रेस पार्टी केवल पुराने विधानसभा चुनावों के प्रदर्शन के बजाय लोकसभा चुनावों के बेहतर स्ट्राइक रेट और बढ़ती स्वीकार्यता को आधार बना रही है। पार्टी सभी सीटों पर सर्वे कराकर अपने लिए सम्मानजनक और बराबरी की हिस्सेदारी चाहती है, जिससे सपा के सामने सीटों के तालमेल को लेकर एक नई चुनौती खड़ी हो गई है।

Location :  Lucknow

Published :  24 August 2026, 11:01 AM IST

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