नोएडा के ट्विन टावर की तरह गिरेगी गाजियाबाद की गुलमोहर ग्रीन्स सोसाइटी की 2 बिल्डिंग, जानें क्यों

गाजियाबाद की गुलमोहर ग्रीन्स सोसायटी में कथित अवैध निर्माण के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टावर नंबर 27 और 28 को ध्वस्त करने तथा चार अन्य टावरों की नौवीं और दसवीं मंजिल हटाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने बिल्डर पर 25 लाख रुपये का हर्जाना लगाया है। साथ ही एफआईआर, GDA अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच और साझा क्षेत्रों को सोसायटी को वापस दिलाने के निर्देश दिए हैं।

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 28 October 2026, 3:56 PM IST
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Ghaziabad News: गाजियाबाद की गुलमोहर ग्रीन्स सोसायटी में कथित अवैध निर्माण के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के सख्त रुख ने बिल्डर और गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अदालत ने टावर नंबर 27 और 28 को पूरी तरह ध्वस्त करने का आदेश दिया है। इसके अलावा चार अन्य टावरों की नौवीं और दसवीं मंजिल हटाने के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट ने बिल्डर पर 25 लाख रुपये का हर्जाना भी लगाया है। साथ ही एफआईआर दर्ज करने और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

दो टावर पूरी तरह गिरेंगे, चार की ऊपरी मंजिलें हटेंगी

अदालत के आदेश के मुताबिक, सोसायटी के टावर नंबर 27 और 28 को पूरी तरह ध्वस्त किया जाना है। वहीं, टावर नंबर 16, 17, 18 और 19 की नौवीं और दसवीं मंजिल को दो महीने के भीतर हटाने के निर्देश दिए गए हैं। इस आदेश से सोसायटी में निर्माण की वैधता और उसे मिली मंजूरियों को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। मामले में अदालत ने निर्माण से जुड़े नियमों और निर्धारित प्रक्रियाओं के पालन पर भी सवाल उठाए हैं। आदेश का असर सोसायटी के निवासियों के साथ-साथ बिल्डर और निर्माण को मंजूरी देने वाले अधिकारियों पर भी पड़ सकता है।

बिल्डर पर 25 लाख रुपये का हर्जाना

हाईकोर्ट ने बिल्डर पर 25 लाख रुपये का हर्जाना लगाया है। निर्देश दिया गया है कि यह रकम एक महीने के भीतर रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) के खाते में जमा कराई जाए। अदालत के सामने यह मुद्दा भी आया कि अनिवार्य पूर्णता प्रमाणपत्र हासिल किए बिना ही फ्लैटों का कब्जा दे दिया गया था। पूर्णता प्रमाणपत्र किसी इमारत के निर्माण और निर्धारित मानकों के अनुपालन की पुष्टि करने वाली महत्वपूर्ण प्रक्रिया का हिस्सा होता है। ऐसे प्रमाणपत्र के बिना कब्जा दिए जाने से भवन की सुरक्षा और नियमों के पालन को लेकर चिंताएं पैदा होती हैं।

GDA अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल

इस मामले में हाईकोर्ट ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की भूमिका की जांच के निर्देश दिए हैं। अदालत ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच कराने और जिम्मेदार निरीक्षक को निलंबित करने की कार्रवाई करने को कहा है। इसके साथ ही बिल्डर के खिलाफ दो सप्ताह के भीतर एफआईआर दर्ज करने और मामले की जांच अतिरिक्त पुलिस आयुक्त स्तर के अधिकारी से कराने का निर्देश दिया गया है। इन निर्देशों का उद्देश्य निर्माण से जुड़ी कथित अनियमितताओं और मंजूरी की प्रक्रिया में संभावित लापरवाही की जांच करना है।

वायुसेना की जमीन और साझा क्षेत्रों का विवाद

गुलमोहर ग्रीन्स सोसायटी से जुड़े विवाद में केवल अतिरिक्त निर्माण का मामला ही नहीं है। इसमें निर्माण को नियमित करने, भारतीय वायुसेना की अधिग्रहित जमीन को भूखंड के कुल क्षेत्रफल में शामिल करने और सोसायटी के साझा क्षेत्रों की बिक्री जैसे मुद्दे भी सामने आए हैं। साझा क्षेत्र वे हिस्से होते हैं जिनका उपयोग सोसायटी के निवासी सामूहिक रूप से करते हैं। अदालत ने ऐसे क्षेत्रों की पहचान कर उन्हें सोसायटी को वापस दिलाने के निर्देश भी दिए हैं। इस पहलू का सीधा संबंध निवासियों के अधिकारों और सोसायटी की संपत्ति के प्रबंधन से है।

नोएडा ट्विन टावर ध्वस्तीकरण की फिर आई याद

अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की बात आते ही नोएडा के सुपरटेक ट्विन टावर का मामला भी याद आता है। अगस्त 2022 में इन दोनों ऊंची इमारतों को विस्फोटकों की मदद से ध्वस्त किया गया था। इस कार्रवाई ने देशभर में अवैध निर्माण, बिल्डिंग नियमों और नियामक संस्थाओं की जवाबदेही पर व्यापक चर्चा छेड़ी थी। गुलमोहर ग्रीन्स सोसायटी का मामला भी इसी तरह निर्माण की मंजूरी, नियमों के अनुपालन और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही से जुड़े सवाल सामने लाता है। हालांकि, दोनों मामलों के तथ्य और न्यायिक आदेश अलग-अलग हैं। अब गुलमोहर ग्रीन्स सोसायटी में हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन पर नजर रहेगी। टावरों को गिराने, अतिरिक्त मंजिलें हटाने, हर्जाने की रकम जमा कराने और अधिकारियों के खिलाफ जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होगा कि आदेश को किस तरह लागू किया जाता है।

 

Location :  Ghaziabad

Published :  28 October 2026, 3:56 PM IST

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