निठारी कांड का डरावना सच: क्या सच में बच्चों की खोपड़ी खाता था सुरेंद्र कोली? लड़कियों के गायब होने से कंकाल मिलने तक की कहानी

नोएडा के निठारी कांड ने साल 2006 में पूरे देश को हिला दिया था। बच्चों के गायब होने, नाले से कंकाल मिलने और सुरेंद्र कोली-मोनिंदर सिंह पंढेर की गिरफ्तारी तक की यह कहानी आज भी देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल है...

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 18 September 2026, 2:05 PM IST
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Noida News: नोएडा में "निठारी कांड" के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में अपनी चाय की दुकान पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। क्या आपको पता है कि नोएडा के निठारी गांव में साल 2006 में सामने आया एक ऐसा मामला, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था। एक के बाद एक बच्चों और युवतियों के गायब होने की घटनाओं ने इलाके में डर का माहौल पैदा कर दिया था। जब जांच आगे बढ़ी तो सेक्टर-31 स्थित एक कोठी के पास नाले से मानव कंकाल और अवशेष मिलने लगे। इस खुलासे ने पुलिस और जांच एजेंसियों पर कई सवाल खड़े कर दिए थे।

बाद में दोनों को बरी किया

इस मामले में बिजनेसमैन मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके घरेलू नौकर सुरेंद्र कोली को आरोपी बनाया गया था। दोनों पर हत्या, अपहरण और सबूत मिटाने जैसे गंभीर आरोप लगे। हालांकि बाद की न्यायिक प्रक्रिया में जांच और सबूतों को लेकर कई सवाल उठे और सुरेंद्र कोली को आखिरी मामलों में भी सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली।

बच्चों के लगातार गायब होने से फैला था डर

निठारी कांड की शुरुआत बच्चों के लगातार गायब होने से हुई थी। 20 जून 2005 को आठ साल की बच्ची ज्योति पानी की टंकी के पास खेलने गई थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। परिवार ने उसकी काफी तलाश की, मगर कोई जानकारी नहीं मिली। इसके बाद छह साल के बच्चे हर्ष समेत कई अन्य बच्चे भी लापता होते गए। धीरे-धीरे निठारी इलाके में डर का माहौल बनने लगा। लोग अपने बच्चों को घर से बाहर भेजने में भी डरने लगे। कई परिवारों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन शुरुआती जांच में कोई बड़ा सुराग हाथ नहीं लगा।

पायल के गायब होने से जांच को मिला अहम सुराग

मामले में बड़ा मोड़ 7 मई 2006 को आया, जब 21 वर्षीय पायल के गायब होने के बाद पुलिस ने उसकी कॉल डिटेल खंगाली। जांच में एक नंबर ऐसा मिला, जिस पर कई बार बातचीत हुई थी। यह नंबर मोनिंदर सिंह पंढेर का निकला। पुलिस ने पंढेर से पूछताछ की। शुरुआती दौर में वह खुद को निर्दोष बताता रहा, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर पुलिस का शक गहराता गया। इसके बाद दिसंबर 2006 में हुई पूछताछ के बाद जांच एजेंसियां पंढेर की कोठी तक पहुंचीं।

कोठी के पास नाले से मिले कंकाल

दिसंबर 2006 में पंढेर की कोठी के पास नाले की सफाई के दौरान कई बच्चों के कंकाल और मानव अवशेष बरामद हुए। इसके बाद निठारी कांड देशभर में चर्चा का विषय बन गया। लोगों ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और सजा की मांग को लेकर प्रदर्शन किए। सीबीआई जांच में सुरेंद्र कोली के खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए। जांच एजेंसी ने 19 एफआईआर दर्ज की थी, जिनमें छह मामलों में मोनिंदर सिंह पंढेर को भी आरोपी बनाया गया था।

अदालतों में चला लंबा कानूनी सफर

निठारी कांड में निचली अदालतों ने सुरेंद्र कोली को कई मामलों में दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। हालांकि बाद में उच्च अदालतों में कई फैसले बदले। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सबूतों की कमी के आधार पर पंढेर और कोली को कई मामलों में बरी कर दिया। नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने भी जांच एजेंसियों की जांच में कमियों और पर्याप्त वैज्ञानिक व फॉरेंसिक सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए सुरेंद्र कोली को उसके बचे हुए मामलों में बरी कर दिया। निठारी कांड आज भी भारत के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में गिना जाता है।

Location :  Noida

Published :  18 September 2026, 2:05 PM IST

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