
तर्पण कर व्यापारियों ने क्यों किया प्रदर्शन? (IMG: Dynamite News)
Kanpur News: कानपुर में डिजिटल भुगतान को लेकर व्यापारियों ने विरोध का ऐसा तरीका अपनाया, जिसने सबका ध्यान खींचा। सरसैया घाट पर व्यापारी यूपीआई मशीनों और क्यूआर कोड का तर्पण करने पहुंच गए। हिंदू रीति-रिवाज के साथ पुरोहित ने मंत्रोच्चार किया और एक व्यापारी ने सिर मुंडवाकर प्रतीकात्मक रूप से डिजिटल भुगतान उपकरणों का तर्पण किया। भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के बैनर तले हुए इस प्रदर्शन में मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) पर शुल्क और जीएसटी लगाने के मुद्दे को उठाया गया। व्यापारियों ने चेतावनी दी कि उनकी मांगें 14 अक्टूबर तक नहीं मानी गईं तो वे बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
कानपुर के सरसैया घाट पर व्यापारियों ने डिजिटल भुगतान से जुड़े शुल्कों के विरोध में प्रदर्शन किया। इस दौरान यूपीआई मशीनों और क्यूआर कोड स्कैनर का प्रतीकात्मक तर्पण किया गया। प्रदर्शन का तरीका धार्मिक परंपरा से जुड़ा था, जिसके जरिए व्यापारियों ने अपनी नाराजगी सार्वजनिक रूप से जाहिर करने की कोशिश की। भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्रा ने कहा कि व्यापारियों को पहले कैशलेस इंडिया के तहत डिजिटल लेनदेन अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। अब डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क और टैक्स का बोझ पड़ने की आशंका व्यापारियों के लिए चिंता का विषय बन गई है।
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प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों ने मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर पर 0.4 प्रतिशत शुल्क और उस पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगाए जाने का विरोध किया। उनका कहना है कि डिजिटल भुगतान से जुड़े शुल्कों की व्यवस्था पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए, ताकि छोटे और बड़े कारोबारियों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव न पड़े। एमडीआर वह शुल्क है, जो कुछ प्रकार के डिजिटल भुगतान में व्यापारी से भुगतान सेवा प्रदाता या संबंधित वित्तीय संस्थान की ओर से लिया जा सकता है। हालांकि, यह शुल्क हर तरह के यूपीआई लेनदेन पर एक समान लागू नहीं होता। इसलिए व्यापारियों की ओर से बताए गए शुल्क और 15 अक्टूबर से लागू होने के दावे के संबंध में संबंधित नियमों और भुगतान के प्रकार की पुष्टि जरूरी है।
व्यापारियों ने यह मुद्दा ऐसे समय उठाया है, जब दिवाली का त्योहार नजदीक है और बाजारों में खरीदारी बढ़ने की उम्मीद रहती है। उनका कहना है कि छोटे कारोबार में मुनाफे का अंतर पहले से ही सीमित होता है। ऐसे में यदि लेनदेन पर अतिरिक्त शुल्क देना पड़ेगा, तो इसका असर उनकी कमाई पर पड़ सकता है। ज्ञानेश मिश्रा के मुताबिक, व्यापारियों को ग्राहकों को प्रतिस्पर्धी कीमतों पर सामान उपलब्ध कराने के साथ अपने कारोबार का खर्च भी संभालना पड़ता है। ऐसे में अतिरिक्त शुल्क उनकी जेब पर बोझ बढ़ा सकते हैं। व्यापारियों का तर्क है कि डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने के साथ ऐसी व्यवस्था भी होनी चाहिए, जिससे छोटे दुकानदारों को अतिरिक्त आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े।
प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों ने साफ कहा कि वे एमडीआर और जीएसटी से जुड़े शुल्कों की व्यवस्था पर पुनर्विचार चाहते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 14 अक्टूबर तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। सरसैया घाट पर किया गया यह प्रदर्शन डिजिटल भुगतान से जुड़े शुल्कों को लेकर व्यापारियों की चिंता सामने लाने की कोशिश थी। यूपीआई मशीनों और क्यूआर कोड का तर्पण कर उन्होंने अपने विरोध को एक अलग प्रतीकात्मक रूप दिया।
Location : Kanpur
Published : 9 October 2026, 2:48 PM IST
Topics : GST News Kanpur News Sarsaiya Ghat UP News UPI Payment