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उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने SIR प्रक्रिया को लेकर BJP और चुनाव आयोग पर हमला किया। लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि SIR के बहाने लोकतंत्र और संविधान को कमजोर किया जा रहा है और घोसी उपचुनाव से पहले हर विधानसभा में 20,000 वोट काटने के निर्देश दिए गए हैं।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव का बड़ा बयान
Lucknow: उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और चुनाव आयोग पर जोरदार हमला किया है। शनिवार, 29 नवंबर को लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) के बहाने संविधान को कमजोर करने और लोकतंत्र पर चोट पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि घोसी उपचुनाव से पहले हर विधानसभा में 20 हजार वोट काटने के निर्देश दिए गए हैं।
घोसी उपचुनाव और वोटर डेटा पर चिंता
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि घोसी में अभी सुधाकर सिंह की तेरहवीं भी नहीं हो पाई है, फिर भी बीजेपी ने तैयारी शुरू कर दी है। उनका दावा है कि मऊ सदर विधानसभा से 20,000 वोट काट दिए गए हैं, और घोसी लोकसभा क्षेत्र की हर विधानसभा में इसी तरह का खेल चल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कई गांवों में BLO अभी तक नहीं पहुंचे हैं, जिससे वोटर डेटा अधूरा और प्रभावित हो रहा है।
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अखिलेश यादव ने कहा कि चुनाव आयोग और बीजेपी मिलकर SIR के जरिए वोटर के अधिकार को छीनने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकारी डेटा बताता है कि फॉर्म वितरित हो चुके हैं, लेकिन ग्राउंड पर ऐसा नहीं है। उनका कहना है कि यह एक सोची-समझी साजिश है, जिससे संविधान और लोकतंत्र पर चोट लग रही है।
सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि बीजेपी सभी वोटर का डेटा इकट्ठा कर रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने डिजिटल संसाधनों और कंपनियों के माध्यम से यह काम किया है। इसके जरिए मतदाताओं की पहचान और वोटिंग अधिकार पर नियंत्रण किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि SIR के बहाने आरक्षण और वोटर की पहचान छीनने की कोशिश की जा रही है, जो लोकतंत्र के लिए खतरा है।
अखिलेश यादव ने कहा कि बंगाल में भी चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उनके मुताबिक, जो काम BLO नहीं कर पा रहे हैं, वही काम सफाई कर्मचारियों को कराना पड़ा। उन्होंने कहा कि CC टीवी रिकॉर्डिंग की जानकारी नहीं दी जा रही, जिससे पारदर्शिता का अभाव है।
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अखिलेश यादव का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के बहाने वोटर अधिकार और संविधान पर हमला किया जा रहा है। उनका कहना है कि बीजेपी डिजिटल और संसाधनों के माध्यम से वोटर डेटा इकट्ठा कर रही है और चुनाव आयोग इस प्रक्रिया में पूरी तरह विफल दिखाई दे रहा है। इस मामले ने उत्तर प्रदेश में SIR प्रक्रिया और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर बहस को बढ़ा दिया है।