हिंदी
सीतापुर के सरैया चलाकापुर गांव में खाना बनाते समय लगी आग ने दो महिलाओं की जान ले ली, जबकि एक बालिका गंभीर रूप से झुलस गई। तेज आंधी और संकरे रास्ते की वजह से दमकल मौके पर नहीं पहुंच पाई। ग्रामीणों ने नल से बाल्टियां भरकर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन आग ने 14 घरों को खाक कर दिया।
सीतापुर में अग्निकांड
Sitapur: शनिवार की देर शाम एक मामूली चिंगारी ने गांव में भयावह आग का रूप ले लिया। राजाराम के घर में रात का खाना बनाते समय निकली चिंगारी उनके छप्पर तक पहुंच गई। तेज आंधी ने आग को भड़काया और देखते ही देखते यह त्रासदी में बदल गई। इस आग में फंसकर फूलमती (45) और उनकी मां (60) की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं सात वर्षीय माही गंभीर रूप से झुलस गई।
14 घर जलकर राख हो गए
गांववासी आग लगते ही दौड़े और अपने निजी संसाधनों से आग बुझाने में जुट गए। हैंडपंप और बाल्टियों से पानी डालते रहे, लेकिन तेज आंधी ने उनके सभी प्रयासों को नाकाम कर दिया। ग्रामीणों ने बताया कि आग इतनी तेजी से फैल रही थी कि 14 घर जलकर राख हो गए। मवेशी भी आग की चपेट में आ गए।
दमकल पहुंचने में दिक्कत
ग्रामीणों ने तुरंत पुलिस और दमकल को सूचना दी। पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे, लेकिन दमकल संकरे रास्ते में फंस गई। यदि चौड़ा मार्ग होता तो दमकल समय रहते आग पर काबू पा सकती थी। खबर लिखे जाने तक दमकल मौके पर नहीं पहुंच पाई थी।
पीड़ित परिवार की व्यथा
राजाराम ने बताया कि उनके घर में खाना बन रहा था, तभी अचानक चिंगारी से छप्पर में आग लग गई। उनके भाई शत्रोहन, अवधराम, वीरेश, हरिश्चंद्र, झब्बूलाल, देशराज, श्री राम, राजू, रमेश प्रकाश, रामलाल, सावन, सुरेश प्रकाश और अशोक वर्मा के घर भी आग की चपेट में आ गए। यह आग केवल घरों को ही नहीं, बल्कि गांव के निवासियों की जिंदगी को भी तहस-नहस कर गई। स्थानीय तहसील प्रशासन को ग्रामीणों ने तुरंत सूचना दी है। अधिकारियों का कहना है कि संकरे रास्ते के कारण दमकल की देरी हुई और अब उन्हें गांव तक पहुंचने का वैकल्पिक रास्ता तलाशना पड़ेगा।