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गोरखपुर के दक्षिणांचल के दर्जनों गांवों के लिए बालू खनन अब अभिशाप बन गया है। यहां से गुजर रहे ओवरलोड ट्रकों ने सड़क और घरों को भारी नुक्सान पहुंचाया है। क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से ओवरलोडिंग और अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
ओवरलोड ट्रक ग्रामीणों के लिए बने सिरदर्द
Gorakhpur: जनपद के दक्षिणांचल क्षेत्र में स्थित ग्राम रतनपुर व बनकटी में चल रहा बालू खनन अब विकास नहीं, बल्कि क्षेत्रवासियों के लिए एक गंभीर अभिशाप बन चुका है। खनन कार्य शुरू होने के बाद से ही इस इलाके की सड़कें पूरी तरह ध्वस्त हो गई हैं, जिससे दर्जनों गांवों के लोगों का रोजमर्रा का आवागमन अत्यंत कठिन हो गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि खनन विभाग को लाखों रुपये का राजस्व भले ही मिल रहा हो, लेकिन इसके एवज में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की करोड़ों रुपये की सड़कें बर्बाद कर दी गई हैं।
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समदपुर से रतनपुर तक लगभग 5 किलोमीटर लंबा मार्ग, जो ग्रामीण क्षेत्र के लिए जीवनरेखा माना जाता था, अब पूरी तरह जर्जर हो चुका है। इस मार्ग से रतनपुर, मलौली, हरिहरपुर, बनकटी, प्रतापीपुर, महुआडांड़, अलावलपुर, मधुपट्टी, कुरावल सहित दर्जनों गांव जुड़े हुए हैं, जिनके हजारों ग्रामीण प्रतिदिन इसी रास्ते से आवाजाही करने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों के अनुसार यह सड़क लगभग 15 टन भार क्षमता के अनुरूप निर्मित की गई थी, जबकि बालू ढुलाई में लगे ट्रक और डंपर 50 से 60 टन, कहीं-कहीं 70 टन तक ओवरलोड होकर धड़ल्ले से गुजर रहे हैं। ओवरलोड वाहनों के कारण सड़क जगह-जगह से टूटकर धंस चुकी है। बरसात में हालात और बदतर हो जाते हैं, जबकि सामान्य दिनों में भी दोपहिया और पैदल चलना तक जोखिम भरा हो गया है।
सिर्फ सड़क ही नहीं, बल्कि ओवरलोड ट्रकों से उत्पन्न तेज कंपन ने सड़क किनारे बसे लोगों के घरों को भी नुकसान पहुंचाया है। कई मकानों की नींव हिल चुकी है, दीवारों में दरारें पड़ गई हैं। लाखों रुपये खर्च कर घर बनाने वाले लोग अब असहाय होकर पूछ रहे हैं कि अपनी शिकायत किससे करें।
इस संबंध में पीडब्ल्यूडी के अवर अभियंता राजकुमार ने बताया कि “15–20 टन रोलर से बनी सड़क पर 60–70 टन की गाड़ियां कैसे चल सकती हैं। यह तकनीकी रूप से संभव ही नहीं है।” उन्होंने कहा कि इस गंभीर समस्या को लेकर आरटीओ को पत्र भेजा जाएगा।
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क्षेत्रवासियों का कहना है कि बालू खनन से कुछ गिने-चुने लोगों को लाभ हो रहा है, जबकि इसका खामियाजा दर्जनों गांवों की जनता भुगत रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रशासन कब जागेगा और कब ओवरलोडिंग व अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई होगी।