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संभल हिंसा मामले में ASP अनुज चौधरी व अन्य पुलिसकर्मियों पर FIR का आदेश देने वाले CJM विभांशु सुधीर का इलाहाबाद हाई कोर्ट के निर्देश पर तबादला कर दिया गया है। उन्हें संभल से सुल्तानपुर भेजते हुए CJM पद से हटाकर सिविल जज बनाया गया है।
CJM विभांशु सुधीर का हुआ तबादला (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
Sambhal: उत्तर प्रदेश के संभल में जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुई हिंसा से जुड़े मामले में एक बड़ा प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया है। एएसपी अनुज चौधरी और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश देने वाले मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) विभांशु सुधीर का अचानक तबादला कर दिया गया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट के निर्देश पर उन्हें संभल से सुल्तानपुर स्थानांतरित किया गया है। खास बात यह है कि इस तबादले के साथ ही उन्हें CJM पद से हटाकर सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के पद पर भेजा गया है, जिसे प्रशासनिक तौर पर डिमोशन के रूप में देखा जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेशानुसार न्यायिक अधिकारियों की सूची में बदलाव किया गया है। इसी क्रम में CJM विभांशु सुधीर को संभल से हटाकर सुल्तानपुर भेजा गया। संभल जैसे संवेदनशील जिले में उनके इस आदेश के बाद पहले से ही प्रशासनिक हलचल तेज थी, और अब उनका तबादला कई सवाल खड़े कर रहा है।
संभल हिंसा के दौरान आलम नामक युवक घायल हुआ था। उसके पिता यमन ने अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि पुलिस की कार्रवाई में उनका बेटा घायल हुआ। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए CJM विभांशु सुधीर ने एएसपी अनुज चौधरी, इंस्पेक्टर अनुज तोमर और करीब 15 से 20 अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था।
इस आदेश के सामने आते ही संभल पुलिस और प्रशासन में हड़कंप मच गया था। पुलिस महकमे का कहना था कि संबंधित पुलिसकर्मी अपनी ड्यूटी निभा रहे थे और उनके खिलाफ एफआईआर का आदेश गलत तथ्यों पर आधारित है।
CJM के आदेश के बाद संभल के पुलिस अधीक्षक (SP) कृष्ण कुमार बिश्नोई ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि पुलिस विभाग इस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती देगा। उन्होंने स्पष्ट किया था कि जब तक उच्च न्यायालय से कोई निर्देश नहीं आते, तब तक एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। प्रशासन का तर्क था कि हिंसा की स्थिति में पुलिस ने हालात को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की थी।
CJM विभांशु सुधीर को सुल्तानपुर भेजे जाने के साथ-साथ CJM पद से हटाकर सिविल जज (सीनियर डिवीजन) बनाया गया है। न्यायिक और प्रशासनिक गलियारों में इसे एक पायदान नीचे का पद माना जाता है। इसी वजह से यह तबादला महज स्थानांतरण नहीं, बल्कि डिमोशन के तौर पर भी देखा जा रहा है, जिस पर अब बहस शुरू हो गई है।
संभल में 16वीं सदी की जामा मस्जिद को लेकर विवाद तब गहराया, जब एक याचिका में दावा किया गया कि मस्जिद का निर्माण प्राचीन हरिहर मंदिर के अवशेषों पर हुआ है। अदालत ने इस दावे की जांच के लिए सर्वे का आदेश दिया।
19 नवंबर को पहला सर्वे शांतिपूर्वक संपन्न हुआ, लेकिन 24 नवंबर को दूसरे सर्वे के दौरान हालात बिगड़ गए। मस्जिद के आसपास भारी भीड़ जमा हो गई और अफवाहें फैल गईं कि भीतर खुदाई की जा रही है। इससे तनाव बढ़ गया और देखते ही देखते प्रदर्शनकारियों व पुलिस के बीच हिंसक झड़प हो गई।
इस हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई थी, जबकि करीब 29 पुलिसकर्मी और सुरक्षाकर्मी घायल हुए थे। मामला बेहद संवेदनशील होने के कारण राज्य स्तर पर इसकी निगरानी की जा रही है।
CJM विभांशु सुधीर के तबादले के बाद अब यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह महज एक प्रशासनिक निर्णय है या उनके आदेश से जुड़ा कोई कारण है। फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं और आगे की कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है।