SIT की गुप्त रिपोर्ट में खुला बड़ा राज! अनिल मिश्रा ने क्यों कमजोर किए राम मंदिर में सुरक्षा नियम? अब बड़े एक्शन की तैयारी

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT की रिपोर्ट के बाद पूर्व ट्रस्टी डॉ अनिल मिश्रा के खिलाफ पुलिस बड़े एक्शन की तैयारी में है। उन पर सुरक्षा और वित्तीय नियमों को ढील देने के पुख्ता सबूत मिले हैं। वहीं चंपत राय ने इस संवेदनशील मुद्दे पर फिलहाल मौन साधा है।

Updated : 8 July 2026, 12:24 PM IST
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Ayodhya: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के खातों और चढ़ावा चोरी मामले में एक चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। इस संवेदनशील मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) का दायरा अब तेजी से बढ़ता जा रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, SIT की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस अब ट्रस्ट के पूर्व सदस्य डॉ अनिल मिश्रा को इस मामले में आरोपी बनाने की एक बड़ी तैयारी कर रही है। जांच टीम को उनके खिलाफ कई ऐसे पुख्ता सबूत मिले हैं, जो उनकी भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

चोरी के पीछे सुरक्षा नियमों में ढील: अनिल मिश्रा पर गंभीर आरोप

SIT की जांच रिपोर्ट में जो सबसे बड़ा और हैरान करने वाला खुलासा हुआ है, वह मंदिर परिसर के भीतर सुरक्षा और वित्तीय नियमों को जानबूझकर कमजोर किए जाने से जुड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार बैंक के तय नियमों के तहत ट्रस्ट के प्रतिनिधि के रूप में डॉ अनिल मिश्रा ही पूरी व्यवस्था को देख रहे थे।

आरोप है कि अनिल मिश्रा ने ही दानपात्रों से निकलने वाले चढ़ावे की गिनती करने वाले कर्मियों (गणनाकर्मियों) के लिए तय कड़े सुरक्षा नियमों को शिथिल कर दिया था। उनके द्वारा गणनाकर्मियों की विशेष ड्रेस, बायोमीट्रिक सत्यापन और परिसर में प्रवेश-निकास के समय होने वाली कड़ी तलाशी जैसे अनिवार्य नियमों को बेहद कमजोर कर दिया गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि नियमों में दी गई इसी ढील का फायदा उठाकर परिसर के भीतर इतनी बड़ी चोरी को अंजाम दिया गया और सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई।

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सबूतों के आधार पर घेरे में पूर्व ट्रस्टी, वित्तीय लापरवाही आई सामने

अयोध्या में हाल ही में संपन्न हुई राम मंदिर ट्रस्ट की एक अहम बैठक के बाद इस पूरे मामले से जुड़े कई नए और पुख्ता साक्ष्य सामने आए हैं। जांच टीम का स्पष्ट मानना है कि वित्तीय मामलों और नकदी संकलन (कैश कलेक्शन) की सीधी निगरानी की जिम्मेदारी डॉ अनिल मिश्रा के पास ही थी।

जांच के दौरान यह बात भी सामने आई है कि परिसर के भीतर हो रही गड़बड़ियों की जानकारी होने के बावजूद उन्होंने चोरी को रोकने के लिए कोई भी प्रभावी या ठोस कदम नहीं उठाए। फिलहाल जांच एजेंसियां उनके खिलाफ मिले इन तमाम साक्ष्यों की बारीकी से पुष्टि कर रही हैं, जिसके बाद उनके खिलाफ एक बड़ा कानूनी एक्शन लिया जा सकता है।

सीमित थी कोषाध्यक्ष की भूमिका, चंपत राय और अनिल मिश्रा के पास थी कमान

ट्रस्ट की बैठक के बाद वित्तीय लेनदेन और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भी कई बड़े आंतरिक खुलासे हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट के नामित कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी की भूमिका केवल कागजों तक या बेहद सीमित थी। यहां तक कि बैंक संबंधी खर्चों और वित्तीय व्यय पर उनके हस्ताक्षर भी नहीं होते थे। वे अपना अधिकांश समय प्रवास (यात्राओं) पर बिताते थे, जिसके कारण वे दानपात्रों से नकदी निकालने और उसकी गणना की पूरी प्रक्रिया से पूरी तरह अपरिचित थे।

वास्तव में, ट्रस्ट की ट्रेजरी, दैनिक खर्चों और वित्तीय लेनदेन का पूरा संचालन मुख्य रूप से चंपत राय के हाथों में था। चंपत राय के इन्हीं फैसलों और व्यवस्थाओं को धरातल पर क्रियान्वित (लागू) करने का काम अनिल मिश्रा करते थे, जिसमें गोपाल राव भी उनकी अहम भूमिका निभा रहे थे।

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बैंक कर्मियों की मिलीभगत और चंपत राय का 'मौन'

पुलिस की इस जांच की आंच अब केवल ट्रस्ट के पदाधिकारियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें बैंक अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। पुलिस जांच में कई बैंक कर्मियों की इस कथित चोरी में मिलीभगत के पुख्ता सबूत मिले हैं। इसके चलते आने वाले दिनों में ३ से ४ बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी गाज गिरनी तय मानी जा रही है।

दूसरी ओर, इस पूरे वित्तीय विवाद और डॉ अनिल मिश्रा पर लग रहे गंभीर आरोपों के बीच ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने पहली बार अपना एक लिखित बयान जारी किया है। उन्होंने इस पूरे संवेदनशील मामले पर फिलहाल पूरी तरह से मौन धारण कर लिया है। चंपत राय का कहना है कि वे अभी इस पर कुछ नहीं बोलेंगे, लेकिन जैसे ही SIT की अंतिम (फाइनल) रिपोर्ट सार्वजनिक होगी, वे सामने आकर सभी आरोपों का क्रमवार तरीके से सिलसिलेवार जवाब देंगे।

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के बीच अभी तक किसी भी जांच एजेंसी या पुलिस प्रशासन की ओर से डॉ अनिल मिश्रा को आधिकारिक तौर पर आरोपी घोषित किए जाने को लेकर कोई भी औपचारिक या लिखित बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन पुलिस के बढ़ते कदम इस बात का साफ संकेत दे रहे हैं कि आने वाले दिनों में अयोध्या से कोई बड़ी खबर सामने आ सकती है।

Location :  Ayodhya

Published :  8 July 2026, 12:24 PM IST

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