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राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला (Img: Pinterest)
Ayodhya: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच में हर दिन नए और चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। पुलिस और एसआईटी की जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने खुद को बचाने के लिए मोबाइल फोन से अहम डेटा डिलीट कर दिया और कई मोबाइल फोन पूरी तरह फॉर्मेट कर दिए। जांच एजेंसियों का मानना है कि आरोपियों ने चोरी की रकम को ठिकाने लगाने की भी कोशिश की।
पुलिस ने टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, रमाशंकर मिश्रा, करुणेश, अवनीश शुक्ला और गणना प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पुलिस को सीसीटीवी फुटेज में आरोपी समूह बनाकर चढ़ावे की रकम निकालते दिखाई दिए हैं। फुटेज में रकम छिपाने और बाहर ले जाने के दृश्य भी कैद हैं।
जांच के दायरे में अब बैंक अधिकारी और कर्मचारी भी आ गए हैं, जिनकी भूमिका चढ़ावे की गणना में थी। इसके अलावा आरोपियों से जुड़े करीब 30 लोगों की गतिविधियों की भी जांच की जा रही है। पुलिस उनकी भूमिका की पुष्टि के लिए पूछताछ कर रही है।
एसआईटी की जांच में सामने आया कि कुछ आरोपियों और ट्रस्ट से जुड़े लोगों की संपत्ति 50 से 100 गुना तक बढ़ गई। कई लोगों ने कम वेतन होने के बावजूद जमीन, प्लॉट, हॉस्टल और अन्य संपत्तियां खरीदीं। अनुकल्प मिश्रा द्वारा लाखों रुपये खर्च कर धार्मिक आयोजन कराने का मामला भी जांच के घेरे में है।
जांच में यह भी सामने आया कि चोरी की रकम के बंटवारे को लेकर आरोपियों में विवाद हुआ, जिसके बाद शिकायत हुई और पूरा मामला उजागर हो गया। पुलिस फिलहाल केवल 45 दिन की सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच कर रही है, इसलिए यह स्पष्ट नहीं हो सका कि चोरी कब से चल रही थी।
मामले के तूल पकड़ने के बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया। ट्रस्ट ने दावा किया है कि भगवान राम को चढ़ाए गए आभूषण और दान पूरी तरह सुरक्षित हैं तथा दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। मामले में नई जनहित याचिका पर 29 जून को सुनवाई संभावित है।
Location : Ayodhya
Published : 28 June 2026, 8:59 AM IST