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कानपुर देहात के मंगलपुर थाने में एक चौंकाने वाली प्रशासनिक चूक सामने आई है। थाने में लगे थाना प्रभारियों के कार्यकाल बोर्ड से एक निरीक्षक का नाम गायब है, जिसे लेकर अब सवाल उठने लगे हैं कि यह भूल लापरवाही है या जानबूझकर की गई अनदेखी।
गायब हुआ 22 वे थाना प्रभारी का नाम
Kanpur Dehat News: कानपुर देहात के मंगलपुर थाने के सभागार में थाना प्रभारियों के कार्यकाल को दर्शाने वाला एक बोर्ड लगा हुआ है, जिस पर पूर्व में तैनात सभी थानाध्यक्षों के नाम और कार्यकाल दर्ज हैं।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता को मिली जानकारी के अनुसार, हाल ही में इस बोर्ड पर 22वें क्रम में तैनात रहे इंस्पेक्टर दिलीप कुमार बिंद का नाम नहीं है। जिससे यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है।
कार्यकाल का संक्षिप्त विवरण
21वें क्रम पर संजय कुमार गुप्ता का नाम दर्ज है, जिन्होंने 13 जुलाई 2024 को कार्यभार ग्रहण किया था। इसके पश्चात वे मेडिकल अवकाश पर चले गए और उनका स्थानांतरण रनिया थाने में हो गया। इसी अवधि में दिलीप कुमार बिंद जो अकबरपुर में क्राइम इंस्पेक्टर थे। इनको 20 मई 2025 को कार्यवाहक थाना प्रभारी मंगलपुर बनाया गया। बाद में 31 मई को पुलिस अधीक्षक अरविंद मिश्र द्वारा जारी स्थानांतरण सूची में उन्हें स्थायी थाना प्रभारी नियुक्त किया गया। लेकिन 3 जून को पुलिस अधीक्षक द्वारा किए गए औचक निरीक्षण के बाद उन्हें लाइन हाजिर कर दिया गया। इसके अगले ही दिन, 4 जून को धीरेंद्र सिंह ने थाने का चार्ज संभाला।
नाम क्यों नहीं जोड़ा गया बोर्ड पर?
बोर्ड पर सीधे 21वें के बाद 22वें क्रम में धीरेंद्र सिंह का नाम दर्ज है। जबकि, दिलीप कुमार बिंद का नाम इस क्रम में शामिल नहीं किया गया। यह वहम नहीं, बल्कि स्पष्ट चूक है।
जानबूझी अनदेखी या प्रशासनिक भूल?
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या यह नाम जानबूझकर हटाया गया, या फिर यह केवल एक मानवीय त्रुटि है? कई लोगों का मानना है कि चूंकि दिलीप कुमार बिंद का कार्यकाल बहुत छोटा था और उसका अंत लाइन हाजिरी पर हुआ, इसलिए शायद नाम शामिल नहीं किया गया। वहीं कुछ इसे प्रशासनिक असहमति या दबाव का नतीजा भी मान रहे हैं।
जनचर्चा और प्रशासन से अपेक्षा
स्थानीय पुलिसकर्मियों और आम नागरिकों के बीच यह मुद्दा तेजी से फैल रहा है। कई लोगों का मानना है कि चाहे कार्यकाल छोटा रहा हो या विवादित, रिकॉर्ड में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है। अब यह देखना होगा कि प्रशासन इस त्रुटि को सुधारता है या अनदेखा करता है। अगर नाम नहीं जोड़ा गया, तो आने वाले समय में यह एक मिसाल बनेगी कि कैसे एक अधिकारी को रिकॉर्ड से 'हटा' दिया गया।