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खुर्जा के आर्य समाज मंदिर में नाम और धर्म परिवर्तन के बाद विवाह संपन्न हुआ। युवती ने एसएसपी के सामने स्वेच्छा से फैसला लेने का बयान दिया। प्रशासन ने मामले में सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी की हैं।
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Bulandshahr: उत्तर प्रदेश के खुर्जा नगर में गांधी मार्ग स्थित आर्य समाज मंदिर में हुए एक विवाह को लेकर चर्चा तेज हो गई है। यहां 21 वर्षीय युवती रिजवाना ने युवक कोमल शर्मा से विवाह से पहले हिंदू धर्म अपनाया और अपना नाम बदलकर रिंकी रख लिया। इसके बाद दोनों ने आर्य समाज मंदिर में हिंदू रीति-रिवाजों के साथ सात फेरे लिए। इस विवाह में आर्य समाज के सदस्य और विश्व हिंदू परिषद के प्रांत परावर्तन प्रमुख सुनील सोलंकी ने कन्यादान की भूमिका निभाई।
जानकारी के अनुसार, बुलंदशहर जिले के एक थाना क्षेत्र की निवासी रिजवाना और गौतमबुद्धनगर निवासी कोमल शर्मा एक-दूसरे से प्रेम करते थे। दोनों लंबे समय से साथ जीवन बिताने का निर्णय ले चुके थे, लेकिन अलग-अलग धर्म से होने के कारण विवाह को लेकर सामाजिक और कानूनी औपचारिकताओं की चुनौती सामने थी। ऐसे में रिजवाना ने स्वेच्छा से पहले अपना नाम बदला और हिंदू धर्म अपनाने का निर्णय लिया।
विश्व हिंदू परिषद के प्रांत परावर्तन प्रमुख सुनील सोलंकी ने बताया कि युवती ने विवाह से पहले अपना नाम बदलकर रिंकी रखा और हिंदू धर्म की परंपराओं को अपनाया। इसके बाद आर्य समाज मंदिर में विधिवत पूजा-पाठ और वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच विवाह संपन्न कराया गया। विवाह की सभी रस्में पुरोहित द्वारा कराई गईं और पूरे कार्यक्रम का वीडियो व फोटो रिकॉर्ड भी तैयार किया गया।
आर्य समाज मंदिर में हुए इस विवाह में वैदिक परंपराओं के अनुसार हवन, मंत्रोच्चारण और सात फेरे की रस्म निभाई गई। मंदिर परिसर में सीमित संख्या में लोग मौजूद रहे। विवाह के दौरान सुरक्षा और कानून व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए पूरी प्रक्रिया शांति से संपन्न कराई गई। आर्य समाज की परंपरा के अनुसार विवाह प्रमाण पत्र भी जारी किया गया।
सुनील सोलंकी के अनुसार, विवाह के बाद युवती रिंकी (पूर्व में रिजवाना) ने एसएसपी के समक्ष अपने बयान दर्ज कराए हैं। बयान में उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी मर्जी से नाम और धर्म परिवर्तन किया है और किसी भी प्रकार का दबाव या प्रलोभन नहीं था। पुलिस प्रशासन ने बयान दर्ज कर कानूनी औपचारिकताओं को पूरा किया।
विश्व हिंदू परिषद के प्रांत परावर्तन प्रमुख सुनील सोलंकी ने बताया कि संगठन का उद्देश्य ऐसे मामलों में कानूनी प्रक्रिया के तहत सहयोग करना है। उन्होंने कहा कि युवती ने पूरी तरह अपनी इच्छा से यह फैसला लिया और विवाह की सभी प्रक्रियाएं खुले तौर पर संपन्न हुईं। उन्होंने यह भी बताया कि कन्यादान की जिम्मेदारी उन्होंने सामाजिक दायित्व के तहत निभाई।