हिंदी
Muzaffarnagar Court (IMG: Dynamite News)
Muzaffarnagar: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद की फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर इन दिनों अपने फैसलों को लेकर चर्चा में हैं। वाराणसी के बहुचर्चित ज्ञानवापी मामले में फैसला सुनाने वाले न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने अब मुजफ्फरनगर में संगीन अपराधों के मामलों में लगातार सख्त फैसले सुनाकर एक अलग पहचान बनाई है। मुजफ्फरनगर पहुंचने के बाद करीब 8 महीने के भीतर उन्होंने 9 गंभीर मामलों में 22 आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई है। इन मामलों में हत्या, लूट के बाद हत्या और अन्य जघन्य अपराध शामिल हैं।
जानकारी के मुताबिक न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर दिसंबर 2025 में बरेली से ट्रांसफर होकर मुजफ्फरनगर आए थे। इसके बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 में सुनवाई करते हुए उन्होंने कई गंभीर मामलों में दोषियों को कठोरतम सजा सुनाई। सरकारी अधिवक्ता कुलदीप कुमार ने बताया कि जज रवि कुमार दिवाकर ने अब तक 9 मामलों में 22 लोगों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने इन अपराधों को गंभीरतम श्रेणी में मानते हुए यह फैसला दिया।
न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर इससे पहले वाराणसी के ज्ञानवापी मामले को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए थे। इसके बाद वह चित्रकूट और बरेली में भी तैनात रहे। बरेली से ट्रांसफर होकर वह मुजफ्फरनगर पहुंचे थे। सरकारी अधिवक्ता कुलदीप कुमार ने कहा कि अदालत ने जिन मामलों में फांसी की सजा सुनाई है, वे सभी बेहद गंभीर और जघन्य अपराधों से जुड़े थे। उन्होंने बताया कि अदालत ने अपराधों की गंभीरता को देखते हुए यह कठोर फैसला लिया।
लगातार आए इन फैसलों के बाद न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर एक बार फिर सुर्खियों में हैं। उनके फैसलों को लेकर कानूनी जगत में भी चर्चा हो रही है। हालांकि फांसी की सजा के मामलों में अंतिम फैसला उच्च न्यायालय और अन्य न्यायिक प्रक्रियाओं के अधीन होता है।
Location : Muzaffarnagar
Published : 17 August 2026, 4:48 PM IST