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सोनबरसा में वित्तीय गबन की जांच पर विवाद (फोटो सोर्स- डाइनामाइट न्यूज़)
Maharajganj: विकास खंड अंतर्गत ग्राम सभा सोनबरसा में कथित वित्तीय गबन के मामले की जांच एक बार फिर विवादों में घिर गई है। पूर्व में सामने आई अनियमितताओं को लेकर की गई शिकायत के बाद जहां ग्राम प्रधान की पावर सील कर दी गई थी, वहीं ग्राम पंचायत अधिकारी को भी निलंबित किया गया था। मामले को गंभीर मानते हुए जिले के उच्च अधिकारियों की एक टीम अंतिम जांच के लिए गठित की गई थी, लेकिन अब उसी जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि जांच के लिए नियुक्त जिले के वरिष्ठ अधिकारी बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक ग्राम सभा सोनबरसा पहुंचे। नियमानुसार किसी भी जांच में शिकायतकर्ता को जांच की तिथि, समय और स्थान की सूचना देना आवश्यक होता है, ताकि वह अपने साक्ष्य और पक्ष को अधिकारियों के समक्ष रख सके। लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया। अधिकारियों के गांव पहुंचने की जानकारी मिलने पर शिकायतकर्ता आनन-फानन में मौके पर पहुंचे।
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आरोप है कि अधिकारी गांव में पहुंचने के बाद सीधे ग्राम प्रधान के घर गए और वहां लगभग दो घंटे तक बैठे रहे। इसके बाद जांच के नाम पर औपचारिक कार्रवाई शुरू की गई। शिकायतकर्ता और ग्रामीणों का कहना है कि जांच टीम ने गांव के अन्य लोगों से न तो कोई पूछताछ की और न ही मौके पर मौजूद ग्रामीणों का पक्ष जानने का प्रयास किया। इससे ग्रामीणों में नाराजगी और अविश्वास का माहौल बन गया।
सबसे गंभीर आरोप यह लगाया जा रहा है कि जांच अधिकारी ग्राम प्रधान के पति मनोहर लाल से ही सवाल-जवाब कर रिपोर्ट तैयार कर रहे थे, जबकि शिकायत उन्हीं के कार्यकाल और कार्यशैली से जुड़ी हुई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि जिस व्यक्ति के खिलाफ आरोप हैं, उसी से पूछताछ कर पूरी जांच करना निष्पक्ष प्रक्रिया नहीं कही जा सकती। जब शिकायतकर्ता ने अधिकारियों से यह सवाल किया कि बिना सूचना दिए आप लोग जांच के लिए कैसे आ गए, तो उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
ग्राम प्रधान के घर बैठकर हुई जांच (फोटो सोर्स- डाइनामाइट न्यूज़)
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच वास्तव में निष्पक्ष और पारदर्शी होती, तो गांव के अन्य लोगों से भी जानकारी ली जाती और सार्वजनिक रूप से बयान दर्ज किए जाते। उनका आरोप है कि पूरी जांच एकतरफा नजर आ रही है और मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे ग्रामीणों में यह आशंका गहराती जा रही है कि दोषियों को बचाने की कोशिश हो सकती है।
शिकायतकर्ता ने इस पूरे प्रकरण को गंभीर बताते हुए उच्च अधिकारियों से दोबारा निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि नई जांच के दौरान शिकायतकर्ता और ग्रामीणों की उपस्थिति अनिवार्य की जाए, ताकि सभी पक्षों को सुना जा सके और सच्चाई सामने आ सके। शिकायतकर्ता ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे इस मामले को उच्च स्तर तक ले जाने के लिए बाध्य होंगे।
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अब सवाल यह है कि प्रशासन इस विवादित जांच प्रक्रिया पर क्या रुख अपनाता है और क्या दोबारा जांच कराई जाएगी। ग्रामीणों की निगाहें प्रशासनिक निर्णय पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि प्रशासन निष्पक्षता सुनिश्चित करता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाता है।
Location : Maharajganj
Published : 17 January 2026, 6:45 PM IST
Topics : Administrative Probe Inquiry Controversy Maharajganj News (महाराजगंज न्यूज़) Panchayat News Sonbarsa