कोर्ट परिसर में बवाल पड़ा भारी! हाईकोर्ट का ऐसा एक्शन, 24 अगस्त तक चार वकीलों की नो एंट्री

लखनऊ जिला न्यायालय में हुई हिंसा के मामले में हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने स्वतः संज्ञान लेते हुए चार अधिवक्ताओं के 24 अगस्त तक जिले की किसी भी अदालत में प्रवेश पर रोक लगा दी। कोर्ट ने आईबी जांच, संपत्ति और आय का ब्योरा तथा पीड़ित को सुरक्षा देने के भी निर्देश दिए।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 29 July 2026, 11:28 AM IST
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Lucknow: लखनऊ जिला न्यायालय परिसर में 21 जुलाई को हुई हिंसा के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने स्वतः संज्ञान लेते हुए चार अधिवक्ताओं के 24 अगस्त तक जिले के किसी भी अदालत परिसर में प्रवेश पर रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए यह अंतरिम आदेश पारित किया।

आईबी जांच और संपत्ति का पूरा ब्योरा देने का आदेश

हाईकोर्ट ने वकीलों के एक वर्ग पर लगे जमीन हड़पने, संगठित कदाचार और कानून व्यवस्था प्रभावित करने के आरोपों को गंभीर मानते हुए खुफिया ब्यूरो (IB) से गोपनीय जांच कराने का निर्देश दिया है। साथ ही चारों अधिवक्ताओं को पिछले 10 वर्षों के आयकर रिटर्न, परिवार के सदस्यों का विवरण तथा संपत्ति और कारोबारी लेन-देन का पूरा ब्यौरा हलफनामे के साथ दाखिल करने का आदेश दिया गया है।

याचिका के बाद शुरू हुई कार्रवाई

यह कार्रवाई अधिवक्ता अभिप्सा मोहंती, कोमल अग्रवाल और आशुतोष श्रीवास्तव द्वारा दाखिल आवेदन के आधार पर शुरू हुई। हाईकोर्ट ने इस आवेदन को जनहित याचिका के रूप में दर्ज करते हुए मामले की सुनवाई शुरू की। अदालत ने जिला न्यायालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था की खामियों और कथित अराजक गतिविधियों पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की।

मारपीट और धमकी के आरोप

मामले में आरोप है कि दीवानी मुकदमे के वादी मोहम्मद शाकिर के साथ अदालत परिसर में मारपीट की गई और उन्हें सेंट्रल बार एसोसिएशन कार्यालय तक घसीटकर जान से मारने की धमकी दी गई। इस संबंध में वजीरगंज थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई। कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत सीसीटीवी फुटेज और जिला न्यायाधीश व पुलिस आयुक्त की रिपोर्ट में चार अधिवक्ताओं की कथित भूमिका सामने आने का उल्लेख किया गया।

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अन्य महत्वपूर्ण निर्देश

हाईकोर्ट ने संबंधित दीवानी मामलों के अभिलेख सील करने, पीड़ित मोहम्मद शाकिर को सुरक्षा उपलब्ध कराने तथा जांच एजेंसियों से यह भी जांच करने को कहा कि क्या इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की संगठित अपराध से संबंधित धारा लागू होती है। इसके अलावा बार काउंसिल ऑफ इंडिया, यूपी बार काउंसिल, गृह मंत्रालय, विधि मंत्रालय, आयकर विभाग और सेंट्रल बार एसोसिएशन को भी पक्षकार बनाने के निर्देश दिए गए हैं।

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24 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि चारों अधिवक्ता निर्धारित तिथि तक अदालत परिसर में प्रवेश नहीं करेंगे। मामले की अगली सुनवाई 24 अगस्त को होगी, जिसमें जांच रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों पर आगे विचार किया जाएगा।

Location :  Lucknow

Published :  29 July 2026, 11:28 AM IST

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