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सपा प्रमुख अखिलेश यादव और प्रदीप यादव (Img: Google)
Lucknow: सपा प्रमुख अखिलेश यादव समेत समाजवादी परिवार और करीबियों को बुधवार की सुबह ने गहरे शोक में डाल दिया। समाजवादी पार्टी संस्थापक मुलायम सिंह यादव के छोटे पुत्र प्रतीक यादव का लखनऊ में असमय निधन हो गया। प्रतीक यादव के निधन की सूचना के बाद राजनीतिक गलियारों से लेकर आम लोगों तक में शोक की लहर दौड़ गई। प्रतीक यादव के निधन पर अखिलेश यादव के गहरे दुख को इस बात समझा जा सकता है कि सपा प्रमुख सीधे KGMU पहुंचे, जहां शव को पोस्टमार्टम के लिये भेजा गया था।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने छोटे भाई प्रतीक यादव के निधन पर अपनी पहली प्रतिक्रिया में गहरा दुख जताया और KGMU में मीडिया के पूछने पर कहा कि प्रतीक यादव एक अच्छा नौजवान था और मेहनत से कुछ करना चाहता था। इस दौरान उनकी मुख मुद्रा और भाव अखिलेश के गहरे दुख को बयां कर रहे थे।
वर्ष 1992 में समाजवादी पार्टी के गठन के बाद मुलायम सिंह यादव परिवार ने कई मुकाम हासिल करने के साथ ही भले ही अनेक राजनीतिक संघर्ष और उतार-चढ़ाव भी देखें हों लेकिन अखिलेश और प्रतीक का भाईचारा हमेशा आदर्श की एक मिसाल बना रहा। अखिलेश समय-समय पर प्रतीक को अपना स्नेह देते रहे और प्रतीक भी हमेशा अखिलेश के पांव छूकर उनका आशीर्वाद लेते रहे।
इस बीच मुलायम परिवार कभी राजनीतिक विरासत और सत्ता संघर्ष की चर्चाओं के केंद्र में रहा, लेकिन अखिलेश यादव और उनके सौतेले भाई प्रतीक यादव का रिश्ता इन तमाम राजनीतिक अटकलों से बिल्कुल अलग रहा। दोनों भाइयों के बीच कभी सार्वजनिक विवाद या विरासत को लेकर तनातनी देखने को नहीं मिली।
यह अखिलेश यादव के स्नेह का ही नतीजा था कि मुख्यमंत्री और पार्टी प्रमुख बनने के मौके पर भी प्रतीक ने बड़े भाई को पूरा सम्मान दिया और राजनीति से दूर रहे। राजनीति से दूरी बनाए रखने वाले प्रतीक यादव हमेशा लो-प्रोफाइल जीवन पसंद करते थे। वे फिटनेस और बिजनेस की दुनिया में सक्रिय रहे, जबकि अखिलेश यादव ने राजनीति की कमान संभाली। इसके बावजूद परिवार के निजी कार्यक्रमों और कठिन समय में दोनों भाइयों की नजदीकियां अक्सर दिखाई देती थीं।
समाजवादी पार्टी के कई पुराने नेताओं का कहना रहा है कि दोनों भाइयों के रिश्ते में हमेशा सम्मान और अपनापन झलकता था। अखिलेश यादव ने भी कई मौकों पर परिवार को राजनीति से ऊपर बताया था। यही कारण रहा कि समाजवादी परिवार में चाहे जितने भी राजनीतिक उतार-चढ़ाव आए हों, लेकिन अखिलेश और प्रतीक के संबंधों पर उसका असर सार्वजनिक रूप से कभी नजर नहीं आया।
Prateek Yadav Death: आखिर क्या थी वह गंभीर बीमारी, जिसने 38 साल में छीन ली प्रतीक यादव की जिंदगी?
प्रतीक यादव की असामयिक मृत्यु की खबर ने एक ऐसे रिश्ते की याद ताजा कर दी, जो सत्ता, पद और विरासत की राजनीति से दूर सिर्फ भाईचारे और पारिवारिक मूल्यों पर आधारित था। लखनऊ में शोक का माहौल है और बड़ी संख्या में समर्थक एवं करीबी परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त कर रहे हैं। लेकिन अखिलेश और प्रतीक के भाइचारे का ही नतीजा है कि दोनों के बीच कभी विरासत की जंग नहीं देखी गई।
Location : Lucknow
Published : 13 May 2026, 3:21 PM IST
Topics : Lucknow News Prateek Yadav Samajwadi Party UP News