आगरा कॉलेज भर्ती घोटाला: 66 संविदा नियुक्तियों में अनियमितता, पांच पूर्व प्राचार्यों पर विजिलेंस केस

आगरा कॉलेज के इंजीनियरिंग संकाय में हुई संविदा नियुक्तियों में बड़े स्तर पर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) ने जांच के बाद कॉलेज के पांच पूर्व प्राचार्यों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।

Post Published By: Rohit Goyal
Updated : 13 May 2026, 4:41 PM IST
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Agra: आगरा कॉलेज के इंजीनियरिंग संकाय में हुई संविदा नियुक्तियों में बड़े स्तर पर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) ने जांच के बाद कॉलेज के पांच पूर्व प्राचार्यों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। आरोप है कि बिना प्रबंध समिति की अनुमति के 66 शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की नियुक्तियां की गईं।

यह कार्रवाई विजिलेंस निरीक्षक सौदान सिंह की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर के आधार पर की गई है।

इन पूर्व प्राचार्यों के खिलाफ दर्ज हुआ मामला

विजिलेंस थाने में दर्ज प्राथमिकी में जयपुर हाउस निवासी डॉ. मनोज रावत, दयालबाग निवासी डॉ. अशोक विक्रम सिंह उर्फ एवी सिंह, माधव कुंज निवासी डॉ. उमेशचंद्र शर्मा, प्रोफेसर कॉलोनी निवासी नरेंद्र सिंह और न्यू आगरा कॉलोनी निवासी डॉ. अनिल कुमार को नामजद किया गया है।

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हालांकि, मामले में शामिल एक अन्य पूर्व प्राचार्य संतोष कुमार की पहले ही मृत्यु हो चुकी है।

सबसे ज्यादा नियुक्तियां डॉ. मनोज रावत के कार्यकाल में

जांच में सामने आया कि डॉ. मनोज रावत के कार्यकाल में सबसे अधिक 54 नियुक्तियां की गईं। इसके अलावा डॉ. एवी सिंह ने 8, डॉ. यूसी शर्मा ने 2 तथा नरेंद्र सिंह और संतोष कुमार ने एक-एक कर्मचारी को नियुक्त किया।

विजिलेंस के अनुसार, इन नियुक्तियों से संबंधित कोई आधिकारिक पत्रावली कॉलेज प्रशासन के पास उपलब्ध नहीं है। जांच में यह भी पाया गया कि कई कर्मचारियों को बिना वैध नियुक्ति पत्र और अनुमोदन के सेवा विस्तार दिया गया।

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प्रबंधन समिति की अनुमति नहीं ली गई

आरोप है कि संविदा नियुक्तियों के लिए कॉलेज की प्रबंध समिति से अनुमति नहीं ली गई थी। जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 7 दिसंबर 2017 को हुई प्रबंधन समिति की बैठक में निर्देश दिए गए थे कि जिन कर्मचारियों के पास वैध नियुक्ति पत्र या अनुमोदन नहीं है, उन्हें कार्यमुक्त किया जाए।

इसके बावजूद कुछ कर्मचारियों को सेवा में बनाए रखा गया और पांच लैब तकनीशियन बिना संविदा प्रक्रिया के ही नियुक्त कर दिए गए।

शासन के आदेश पर हुई थी जांच

एसपी विजिलेंस आलोक शर्मा ने बताया कि शासन ने वर्ष 2022 में आगरा कॉलेज के इंजीनियरिंग संकाय में हुई नियुक्तियों की खुली जांच के आदेश दिए थे। जांच पूरी होने के बाद अनियमितताओं की पुष्टि होने पर विजिलेंस थाने में एफआईआर दर्ज की गई।

किसका कब रहा कार्यकाल

डॉ. अशोक विक्रम सिंह वर्ष 2003 से 2008 तक प्राचार्य रहे। इसके बाद डॉ. यूसी शर्मा ने 2009 तक कार्यभार संभाला। फिर डॉ. मनोज रावत वर्ष 2016 तक प्राचार्य रहे। इसके बाद एक वर्ष तक नरेंद्र सिंह ने पद संभाला, जबकि वर्ष 2017 से 2019 तक डॉ. एके गुप्ता प्राचार्य रहे।

Location :  Agra

Published :  13 May 2026, 4:31 PM IST

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