सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी- हिंदू धर्म जीवन जीने का तरीका…मंदिर जाना जरूरी नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को हिंदू धर्म को लेकर अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि हिंदू धर्म केवल पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक जीवन शैली है।

Updated : 13 May 2026, 4:47 PM IST
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New Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को हिंदू धर्म को लेकर अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि हिंदू धर्म केवल पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक जीवन शैली है। अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति की आस्था साबित करने के लिए मंदिर जाना अनिवार्य नहीं है।

नौ-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने की सुनवाई

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली नौ-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि अगर कोई व्यक्ति अपने घर या झोपड़ी में दीपक जलाता है, तो वही उसकी आस्था और धर्म को दर्शाने के लिए पर्याप्त है।

संविधान पीठ धार्मिक स्वतंत्रता, महिलाओं के धार्मिक स्थलों में प्रवेश और विभिन्न समुदायों की धार्मिक परंपराओं से जुड़े मामलों पर सुनवाई कर रही है। इनमें सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का मामला और दाऊदी बोहरा समुदाय से जुड़े विवाद भी शामिल हैं।

इस संविधान पीठ में न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना, एम एम सुंदरेश, अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, अरविंद कुमार, ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, प्रसन्ना बी वराले, आर महादेवन और जॉयमाल्या बागची शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर चल रही बहस के बीच बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

Location :  New Delhi

Published :  13 May 2026, 4:47 PM IST

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